बीकेटी 2027: टिकट के लिए दावेदारों की बढ़ी सक्रियता, जनसंपर्क से लेकर कार्यक्रमों तक दिखने लगी चुनावी तैयारी

लखनऊ, NIA संवाददाता।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजधानी लखनऊ की बख्शी का तालाब (बीकेटी) विधानसभा सीट पर चुनावी हलचल अभी से तेज होती दिखाई दे रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा)—तीनों दलों में टिकट को लेकर संभावित चेहरों की चर्चा शुरू है। जाहिर है कि चुनाव आने पर प्रत्येक पार्टी को अंततः एक ही प्रत्याशीमैदान में उतारना होगा। फिलहाल कई नाम अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे नजर आ रहे हैं।

बीकेटी की राजनीतिक अहमियत इसलिए भी है क्योंकि 2017 और 2022 में यहां भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि 2012 में सपा के गोमती यादव विधायक बने थे। 2022 में भाजपा के योगेश शुक्ला ने 1,47,922 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि सपा के गोमती यादव को 1,20,134 और बसपा के सलाउद्दीन ‘मुस्सन’ को 35,167 वोट मिले थे।

भाजपा में योगेश शुक्ला के साथ पुराने और नए चेहरों की चर्चा

भाजपा की ओर से वर्तमान विधायक योगेश शुक्ला राजनीतिक चेहरा हैं। 2022 में बीकेटी से निर्वाचित होने के बाद वे लगातार क्षेत्रीय विकास और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने महोना क्षेत्र में सड़क और नाली निर्माण का शिलान्यास किया, जिसमें स्थानीय भाजपा पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

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भाजपा की चर्चा में पूर्व विधायक अविनाश त्रिवेदी का नाम भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। वे 2017 में बीकेटी से भाजपा विधायक चुने गए थे और 96,482 वोट प्राप्त किए थे। 2022 में भाजपा ने उनकी जगह योगेश शुक्ला को प्रत्याशी बनाया था। हालांक‍ि बीकेटी की पिछली टिकट-दावेदारी की चर्चाओं में अरुण सिंह ‘गप्पू’, विजय बहादुर यादव, सदाशिव मिश्रा, संजय सिंह, शिव दर्शन यादव और पवन सिंह जैसे नाम भी सामने आ चुके हैं।

सपा में गोमती यादव का अनुभव, शिवेंद्र यादव की चर्चा

समाजवादी पार्टी में गोमती यादव बीकेटी के स्थापित राजनीतिक चेहरों में हैं। वे 2012 में विधायक रहे और 2022 में सपा के प्रत्याशी के रूप में 1.20 लाख से अधिक वोट हासिल कर चुके हैं। इसलिए 2027 की राजनीतिक चर्चा में उनका नाम स्वाभाविक रूप से बना हुआ है। इसके साथ ही शिवेंद्र यादव का नाम भी 2027 की दावेदारी की चर्चा में आया है। उन्हें पूर्व सपा नेता राजेंद्र यादव के बेटे के रूप में बीकेटी से संभावित दावेदार बताया गया। सपा से जुड़ी स्थानीय सक्रियता का एक और उदाहरण यशवीर लोधी का है। जून 2026 में बीकेटी विधानसभा क्षेत्र में उनके नेतृत्व में सपा कार्यालय का उद्घाटन हुआ। कार्यालय का उद्देश्य क्षेत्र में जनता की मदद, कार्यकर्ताओं की बैठक और बीकेटी के विभिन्न इलाकों में पार्टी के प्रचार-प्रसार को बढ़ाना है।

 बसपा में अभिषेक सिंह ‘बाबू’ का जनसंपर्क

बसपा की ओर से अभिषेक सिंह ‘बाबू’ का नाम फिलहाल सक्रिय जनसंपर्क के लिहाज से स्पष्ट रूप से सामने आया है। उन्होंने बीकेटी के बहादुरपुर सुल्तानपुर, अकड़रिया कलां, खुर्द, लासा, हीरा पुरवा और दुघरा समेत कई गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से मुलाकात की और बाढ़ प्रभावित इलाकों में पुड़ी-सब्जी के पैकेट वितरित किए। उन्होंने क्षेत्र की बाढ़ और गोमती नदी के तटबंध से जुड़े मुद्दे भी उठाए। बसपा स्तर पर प्रदेश में भी 2027 के लिए जनसंपर्क और संगठन मजबूत करने की कवायद चल रही है। पार्टी ने पिछड़े वर्गों के बीच संपर्क बढ़ाने तथा भाईचारा कमेटियों के माध्यम से स्थानीय बैठकों और जनसंपर्क पर जोर दिया है।

टिकट से पहले ही शुरू हो गया ‘अपना आधार’ मजबूत करने का दौर

बीकेटी की तस्वीर से एक बात साफ है, टिकट की आधिकारिक घोषणा भले अभी दूर हो, लेकिन संभावित दावेदार अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने में पीछे नहीं रहना चाहते। कहीं विकास कार्यों के कार्यक्रम हैं, कहीं गांवों में जनसंपर्क, कहीं पार्टी कार्यालय के जरिए संगठन को सक्रिय करने की कोशिश और कहीं स्थानीय समस्याओं को उठाकर जनता के बीच पहुंच बनाने की कवायद। भाजपा के सामने मौजूदा विधायक के प्रदर्शन और संगठनात्मक फीडबैक का सवाल है। सपा में पुराने चुनावी चेहरे के साथ नए चेहरों की चर्चा है। बसपा स्थानीय स्तर पर नए चेहरों और संगठनात्मक सक्रियता के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटी है। सपा के उम्मीदवार चयन को लेकर उपलब्ध रिपोर्टों में स्थानीय लोकप्रियता, संगठन पर पकड़, सामाजिक समीकरण, बूथ प्रबंधन और जनता के बीच दावेदार की स्वीकार्यता जैसे पहलुओं पर सर्वे की बात सामने आई है।

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