सरकार व्‍यापार‍ियों को देगी क्रेड‍िट कार्ड, जानें कैसे और क्‍यो

नई द‍िल्‍ली, NIA संवाददाता।

छोटे कारोबारियों और माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए केंद्र सरकार ने आसान कर्ज सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। सरकार की योजना के तहत उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत माइक्रो एंटरप्राइजेज को पांच लाख तक की सीमा वाला कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा।

इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों को रोजमर्रा के कारोबार के लिए जरूरी रकम, यानी वर्किंग कैपिटल, तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना है।

क्या है ME-Card योजना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2025 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2025-26 में माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड योजना की घोषणा की थी। घोषणा के अनुसार, उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए ₹5 लाख तक की सीमा वाले कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड जारी किए जाएंगे। सरकार ने पहले वर्ष में 10 लाख ऐसे कार्ड जारी करने का लक्ष्य रखा था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे कारोबारियों को जरूरत पड़ने पर आसानी से कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराना है।

इनको म‍िलेगा लाभ

इस सुविधा का लाभ लेने के लिए संबंधित कारोबार का माइक्रो एंटरप्राइज की श्रेणी में होना और उसका उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण होना जरूरी है। हालांकि, केवल उद्यम रजिस्ट्रेशन होने से ₹5 लाख की क्रेडिट सीमा अपने-आप मंजूर नहीं होगी। कार्ड जारी करने और क्रेडिट लिमिट तय करने का अंतिम फैसला बैंक या संबंधित वित्तीय संस्थान करेगा। बैंक कारोबारी की वित्तीय स्थिति, क्रेडिट रिकॉर्ड, कारोबार की जरूरत और अपनी आंतरिक ऋण नीति के आधार पर क्रेडिट सीमा तय कर सकता है।

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अधिकतम ₹5 लाख तक हो सकती है क्रेडिट लिमिट

योजना के तहत क्रेडिट कार्ड की अधिकतम सीमा ₹5 लाख रखी गई है। मगर हर पात्र कारोबारी को पूरी ₹5 लाख की सीमा मिलेगी, यह जरूरी नहीं है। वास्तविक क्रेडिट लिमिट बैंक या लेंडर की जांच के बाद तय की जाएगी। शुरुआती आवेदकों के लिए जॉइनिंग फीस नहीं रखी गई है। वार्षिक शुल्क कार्ड की सीमा का अधिकतम 1 प्रतिशत या ₹1,000, जो भी कम हो, हो सकता है।

किस काम में इस्तेमाल होगा कार्ड

यह क्रेडिट सुविधा मुख्य रूप से कारोबार की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए है। मसलन, कोई दुकानदार या छोटा कारोबारी इसका उपयोग कच्चा माल खरीदने, दुकान का स्टॉक बढ़ाने, सप्लायर को भुगतान करने या कारोबार में अस्थायी रूप से नकदी की कमी को पूरा करने के लिए कर सकता है। इसे सामान्य टर्म लोन से अलग माना जा सकता है। टर्म लोन में आमतौर पर पूरी राशि एक बार में दी जाती है और उसे तय अवधि में चुकाना होता है। इसके विपरीत, रिवॉल्विंग क्रेडिट में कारोबारी स्वीकृत सीमा के भीतर जरूरत के अनुसार रकम का इस्तेमाल कर सकता है। इस्तेमाल की गई राशि का भुगतान करने के बाद उपलब्ध क्रेडिट लिमिट को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

डिजिटल प्रक्रिया पर जोर

योजना में आवेदन और क्रेडिट मूल्यांकन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों के उपयोग पर जोर दिया गया है। UPI और अकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क जैसे डिजिटल सिस्टम के माध्यम से कारोबारी की वित्तीय जानकारी और लेनदेन से जुड़े आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बैंक और वित्तीय संस्थानों को पात्रता का आकलन करने में आसानी हो सकती है। आसान कॉमन डिजिटल एप्लीकेशन फॉर्म के माध्यम से कागजी प्रक्रिया को भी कम करने का प्रयास किया गया है।

MSME की परिभाषा में भी बदलाव

सरकार ने MSME की परिभाषा में भी बदलाव किया है। इससे अधिक कारोबारियों के लिए MSME क्षेत्र की योजनाओं और सुविधाओं का दायरा बढ़ सकता है। माइक्रो एंटरप्राइजेज के लिए निवेश की सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹2.5 करोड़ और टर्नओवर की सीमा ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ कर दी गई है। स्मॉल एंटरप्राइजेज के लिए निवेश और टर्नओवर की सीमा क्रमशः ₹25 करोड़ और ₹100 करोड़ तय की गई है। वहीं, मीडियम एंटरप्राइजेज के लिए निवेश की सीमा ₹125 करोड़ और टर्नओवर की सीमा ₹500 करोड़ कर दी गई है।

छोटे कारोबारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है योजना?

छोटे कारोबारियों के सामने अक्सर सबसे बड़ी समस्या समय पर कार्यशील पूंजी जुटाने की होती है। कारोबार में बिक्री और भुगतान के बीच अंतर के कारण कई बार नकदी की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में यदि क्रेडिट सुविधा आसानी से उपलब्ध होती है, तो कारोबारी कच्चा माल खरीदने, स्टॉक बनाए रखने और रोजमर्रा के भुगतान समय पर करने में सक्षम हो सकता है। हालांकि, योजना के तहत मिलने वाली वास्तविक क्रेडिट सीमा, ब्याज दर और अन्य शर्तें संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान की पात्रता जांच और नीतियों पर निर्भर करेंगी। इसलिए माइक्रो एंटरप्राइजेज को आवेदन से पहले उद्यम पंजीकरण, बैंक की शर्तों, ब्याज दर और भुगतान से जुड़े नियमों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

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