घर, दुकान या सोसाइटी की सुरक्षा के लिए आपने भी CCTV कैमरा लगा रखा है? अगर हां, तो कैमरे की दिशा और उससे बनने वाली फुटेज को लेकर सावधान हो जाइए। सुरक्षा के लिए लगाया गया कैमरा अगर पड़ोसी के घर के निजी हिस्से को लगातार रिकॉर्ड कर रहा है या CCTV में कैद संवेदनशील वीडियो को WhatsApp और सोशल मीडिया पर वायरल किया जा रहा है, तो मामला कानूनी कार्रवाई तक पहुंच सकता है।
लखनऊ के डीसीपी साउथ मोहम्मद मुश्ताक ने CCTV कैमरों को लेकर नागरिकों को महत्वपूर्ण जानकारी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि CCTV का उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना है, किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी पर नजर रखना नहीं।
कैमरा कहां लगाएं और कहां नहीं?
घर की सुरक्षा के लिए CCTV लगाते समय कैमरे का एंगल सबसे महत्वपूर्ण है। कैमरे का फोकस घर के गेट, मुख्य दरवाजे, पार्किंग, बाउंड्री और अपने परिसर की तरफ रखना चाहिए। घर के बाहर लगे कैमरे में सड़क का कुछ हिस्सा या वहां से गुजरने वाले लोग दिखाई देते हैं तो केवल इस वजह से कैमरा गलत नहीं हो जाता। लेकिन यदि कैमरे को जानबूझकर इस तरह लगाया गया है कि पड़ोसी के घर का बेडरूम, बाथरूम या कोई अन्य निजी स्थान लगातार रिकॉर्ड हो रहा है, तो यह निजता के अधिकार से जुड़ा गंभीर मामला बन सकता है।
पड़ोसी को आपत्ति होने पर कैमरे का एंगल बदलने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए कैमरा लगाने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसकी नजर किस दिशा में है।
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निजता के नाम पर न बढ़ाएं परेशानी
सुप्रीम कोर्ट निजता के अधिकार को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार मान चुका है। इसलिए सुरक्षा के नाम पर किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल नहीं दिया जा सकता। डीसीपी साउथ मोहम्मद मुश्ताक के अनुसार CCTV का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए होना चाहिए। किसी व्यक्ति की निजी गतिविधियों पर नजर रखना या उसकी निजी जिंदगी से जुड़ी रिकॉर्डिंग करना इसका उद्देश्य नहीं हो सकता। खासकर महिलाओं से जुड़ी निजी गतिविधियों की रिकॉर्डिंग को लेकर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
महिला की निजी रिकॉर्डिंग पर कानून सख्त
डीसीपी साउथ ने बताया कि महिला की निजी गतिविधि को उसकी अनुमति के बिना देखना, रिकॉर्ड करना या प्रसारित करना गंभीर अपराध हो सकता है। भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 77 में वॉयरिज्म से संबंधित प्रावधान हैं। इसमें महिला की निजी गतिविधि को देखने, रिकॉर्ड करने अथवा प्रसारित करने से जुड़ी परिस्थितियां शामिल हैं। इसलिए CCTV का एंगल तय करते समय ऐसी जगहों को रिकॉर्ड होने से बचाना जरूरी है, जहां किसी व्यक्ति को निजता की उचित अपेक्षा होती है।

CCTV में कैद वीडियो WhatsApp पर डालना भारी पड़ सकता है
किसी घटना की CCTV फुटेज मिलते ही उसे WhatsApp ग्रुप या सोशल मीडिया पर शेयर करना आम बात है। लेकिन हर फुटेज को सार्वजनिक करना उचित नहीं है। अगर वीडियो में किसी महिला, बच्चे, निजी बातचीत, निजी गतिविधि या संवेदनशील घटना की तस्वीरें हैं तो उसे वायरल करने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए। किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक करना या उसकी निजी रिकॉर्डिंग को बिना उचित आधार के प्रसारित करना उसकी निजता का उल्लंघन बन सकता है।
याद रखें, कैमरे में रिकॉर्ड होने का मतलब यह नहीं कि उस वीडियो को कहीं भी शेयर करने का अधिकार मिल गया।
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IT Act की धारा 66E भी समझें
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66E निजता के उल्लंघन से संबंधित है। किसी व्यक्ति के निजी हिस्से की तस्वीर या वीडियो उसकी सहमति के बिना कैप्चर, प्रकाशित या प्रसारित करने की स्थिति में इस धारा के तहत कार्रवाई की बात कही गई है। इसलिए CCTV या मोबाइल कैमरे से बनी रिकॉर्डिंग को सोशल मीडिया पर डालने से पहले उसके कानूनी प्रभाव को समझना जरूरी है।
अपराध की फुटेज मिले तो वायरल नहीं, पुलिस को दें
अगर आपके घर, दुकान या सोसाइटी में लगा CCTV किसी चोरी, मारपीट, हादसे या अन्य अपराध की घटना रिकॉर्ड करता है तो सबसे पहले फुटेज को सुरक्षित रखें। उसे WhatsApp या सोशल मीडिया पर वायरल करने के बजाय पुलिस को उपलब्ध कराना अधिक उचित है। जांच के दौरान CCTV फुटेज महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकती है। घटना के बाद फुटेज को डिलीट करने, एडिट करने या उसके साथ छेड़छाड़ करने से बचना चाहिए।
सड़क दिख रही है तो क्या CCTV गैरकानूनी है?
जरूरी नहीं। सार्वजनिक सड़क, बाजार या सार्वजनिक कार्यक्रम में सामान्य सुरक्षा कैमरे से लोगों का रिकॉर्ड होना अपने आप में हर स्थिति में अपराध नहीं माना जा सकता। मामला तब गंभीर हो सकता है जब कैमरे का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में जानबूझकर दखल देने, निजी हिस्सों की रिकॉर्डिंग करने, फुटेज का गलत इस्तेमाल करने या किसी को बदनाम अथवा परेशान करने के लिए किया जाए।
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