डीएम, एडीएम और एएसपी सहित 27 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय, एडीएम कुंज बिहारी अग्रवाल, एएसपी आशुतोष शुक्ला, ईओ नपा राजेश जायसवाल समेत 27 पर हुई एफआईआर
महराजगंज। यूपी के महराजगंज के 2019 के तत्कालीन डीएम, एडीएम और एएसपी सहित 27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। जबकि 26 नामजद आरोपी हैं। याचिकाकर्ता मनोज टिबड़ेवाल आकाश द्वारा 5 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट में दिए पत्र को ही तहरीर मानकर कोतवाली में केस दर्ज किया गया है।

दरअसल 2019 में हाईवे चौड़ीकरण के लिए बिना प्रक्रिया का पालन किए मकान पर बुलडोजर चलवाया गया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को याचिकाकर्ता को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया था। बीते छह नवंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा था कि प्रक्रिया का पालन किए बगैर किसी के घर में घुसना, तोडऩा अराजकता है।

पीठ ने यूपी सरकार को नगर पालिका परिषद महराजगंज के हमीद नगर में 2019 में सड़क चौड़ी करने के लिए घरों को तोड़े जाने के मसले पर पीडि़त मनोज टिबड़ेवाल की ओर से भेजे पत्र पर संज्ञान लेकर शुरू किए गए मामले में आदेश दिया था। तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय, एडीएम कुंज बिहारी अग्रवाल, एएसपी आशुतोष शुक्ला, ईओ नपा राजेश जायसवाल समेत 27 पर केस दर्ज किया गया है। जांच सीबीसीआईडी करेगी।

एनएच 730 चौड़ीकरण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में
तत्कालीन डीएम अमरनाथ उपाध्याय समेत 27 लोगों के खिलाफ कोतवाली में केस दर्ज होने के बाद शहर में साल 2019 को एनएच 730 चौड़ीकरण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उस समय ढाई सौ लोगों का मकान ध्वस्त हुआ था।

याचिकाकर्ता मनोज टिबड़ेवाल आकाश का कहना है कि सवा दो सौ लोगों ने दहशत में आकर अपना मकान अपने ही हाथों से तोड़ दिए थे। अब स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद मुख्य चौराहा पर ही सड़क से सटाकर मकान का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।

16 मीटर की जरूरत, 22 मीटर तक कर दिया ध्वस्त
याचिकाकर्ता के मुताबिक हाइवे चौड़ीकरण में उन्होंने भी अपने मकान का अगला हिस्सा तुड़वाया था। कहा कि उनकी मां डीएम कार्यालय में पत्र देकर हाईवे निर्माण के लिए अपनी भूमि को अधिग्रहित कर मुआवजा देने की मांग की थी। मकान के सामने सड़क की कुल चौड़ाई 16 मीटर ही थी।

आरोप है कि जिला प्रशासन ने एनएच के इंजीनियरों व पुलिस अफसरों के साथ बीच सड़क से 22 मीटर तक बुलडोजर से जबरन ध्वस्त करा दिया गया। बिना परमिशन, बिना वारंट पुलिस ने घर में घुसकर घर के सभी महिला-पुरुष सदस्यों को जबरन बाहर खींचकर निकाल दिया था।

जरुरी सामानों, यहां तक की मंदिर और कैश बाक्स तक को निकालने के लिए बिना एक मिनट का वक्त दिये बिना लिखित नोटिस के घर व दुकान के समस्त सामानों सहित बुलडोजर से मकान को जमींदोज कर दिया गया था।

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