उत्तर प्रदेश के औरैया में करीब छह साल पहले हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में बुधवार को विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 आरोपितों को दोषी करार दिया। अदालत ने सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के साथ 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। मामले में शामिल एक नाबालिग आरोपित की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में अलग से चल रही है।
मंदिर परिसर में दिनदहाड़े हुई थी गोलीबारी
मामला 15 मार्च 2020 का है। औरैया शहर के नरायनपुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर परिसर में दिनदहाड़े गोलीबारी की घटना हुई थी। इसमें अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने मामले में हत्या, पुलिस पर प्राणघातक हमला और आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं में मुकदमे दर्ज किए थे। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत कई आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
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छह साल चली सुनवाई
मामले की सुनवाई विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में करीब छह साल तक चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 32 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से सफाई साक्ष्य के तौर पर 39 गवाहों के बयान कराए गए। लंबी सुनवाई के बाद बुधवार को अदालत ने कमलेश पाठक समेत 10 आरोपितों को दोषी घोषित किया। फैसले को लेकर न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूर्व एमएलसी को उम्रकैद की सजा मिलने की खबर से उनके समर्थकों में भी मायूसी देखी गई।

इस मुकदमे में छह आरोपित बरी
वहीं, पुलिस की ओर से दर्ज कराए गए प्राणघातक हमले के एक अन्य मुकदमे में अदालत ने सत्येंद्र मिश्रा उर्फ डब्बू, राजेंद्र कुमार बाजपेई, रामचंद्र मिश्रा, आलोक चतुर्वेदी, शुभम दुबे और हरगोविंद उर्फ गुड्डू को बरी कर दिया। इस मामले में आरोपित रहे रवि चतुर्वेदी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है।
नाबालिग आरोपित का मामला अलग
दोहरे हत्याकांड में एक नाबालिग आरोपित भी शामिल था। उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां उसकी सुनवाई अलग से जारी है। करीब छह साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को औरैया के चर्चित आपराधिक मामलों में अहम माना जा रहा है। घटना के बाद से ही यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ था और अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी थीं।
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