उत्तराखंड सरकार ने आपातकाल (Emergency) के दौरान जेल जाने वाले लोकतंत्र सेनानियों को पेंशन या मासिक आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। अब इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
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दरअसल, 25 जून को आपातकाल के 50 साल पूरे होने पर सीएम धामी ने ऐलान किया था कि सरकार उन लोगों को आर्थिक सहायता देगी जिन्होंने 1975-77 के दौरान जेलों में सजा काटी और यातनाएं सही थीं। राज्य सरकार ने गृह मंत्रालय को कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है।
कितनी होगी राशि?
राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लोकतंत्र सेनानियों को कितनी राशि पेंशन के रूप में मिलेगी। संभव है कि गैरसैंण में चल रहे सत्र के दौरान विधानसभा की मंजूरी के बाद इसका विवरण जारी किया जाएगा।
आपातकाल की पृष्ठभूमि
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने आपातकाल लागू किया था, जिसे राष्ट्रपति फखरूद्दीन अली अहमद ने मंजूरी दी थी। करीब 21 महीने तक चले इस दौर में जनसंघ, आरएसएस और विपक्षी दलों के नेताओं को जेल में बंद किया गया और यातनाएं दी गईं। उत्तराखंड के भी कई लोग उस दौर में जेल गए थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में मनाने का ऐलान किया था। इसी क्रम में भाजपा ने लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों का सम्मान भी किया था।
सीएम धामी का बयान
मुख्यमंत्री धामी ने कहा था “कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाकर हमारे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं पर अत्याचार किए थे। संविधान की हत्या करने वाली इंदिरा सरकार ने समाज पर जुल्म ढाए थे। हमारी सरकार लोकतंत्र सेनानियों की चिंता करती है।”
इसी घोषणा के अनुरूप अब उत्तराखंड में भी बिहार और अन्य राज्यों की तर्ज पर पेंशन योजना लागू होने जा रही है।
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