एपीओ दीपक को फंसाने की साजिश: शालिनी शर्मा के बाद अब एडवोकेट अशोक पाण्डेय भी दोषी

लखनऊ, एनआईए संवाददाता। 

फर्जी रेप केस में फंसाकर उगाही करने के मामले में बार काउंसिल ने बड़ी कार्रवाई की है। एडवोकेट शालिनी शर्मा के बाद अब उनके साथी एडवोकेट अशोक पाण्डेय को भी दोषी पाया गया है। अनुशासन समिति ने अशोक पाण्डेय को एडवोकेट एक्ट के तहत दुराचार का दोषी मानते हुए एक साल तक निगरानी में रहने और दोबारा गलती न करने की चेतावनी दी है।

शालिनी शर्मा का रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द

इससे पहले जनवरी 2025 में बार काउंसिल ने एडवोकेट शालिनी शर्मा का रजिस्ट्रेशन रद्द कर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। शालिनी शर्मा पर लखनऊ और वाराणसी में भी मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।

मामला कैसे शुरू हुआ?

आशियाना, लखनऊ निवासी एपीओ दीपक कुमार ने जून 2024 में कैंट थाने, बनारस में शिकायत दर्ज कराई थी।
उन्होंने बताया कि राधेश्याम तिवारी नामक व्यक्ति कॉल करके पैसों की मांग कर रहा था और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दे रहा था।

जांच में सामने आया कि राधेश्याम तिवारी, प्रयागराज निवासी एडवोकेट अशोक पाण्डेय और सहारनपुर निवासी एडवोकेट शालिनी शर्मा के साथ मिलकर दीपक को फंसाने की साजिश कर रहा था।

फर्जी रेप केस और उगाही की कहानी

2023 में प्रयागराज के जार्ज टाउन थाने में दीपक पर फर्जी रेप केस दर्ज कराया गया।

नौकरी से हटाने की धमकी देकर 10 लाख रुपए ऐंठे गए।

इसके बाद समझौते के नाम पर 35 लाख रुपए की मांग की गई।

दीपक के इनकार करने पर शाहजहांपुर में होटल में ले जाकर दूसरा फर्जी रेप केस दर्ज करा दिया गया।

पुलिस जांच में पाया गया कि उस समय दीपक की पोस्टिंग वाराणसी में थी और होटल में जाने का कोई सबूत नहीं था। रिपोर्ट में मामला फर्जी साबित हुआ और केस बंद कर दिया गया।

बार काउंसिल कैसे पहुंचा मामला?

दबाव बनाने के लिए शालिनी शर्मा ने बार काउंसिल में भी फर्जी दस्तावेज लगाकर दीपक की शिकायत की।

जांच में उनके दस्तावेज फर्जी पाए गए।

अनुशासन समिति ने शालिनी को दोषी ठहराया और सख्त कार्रवाई की।

अब अशोक पाण्डेय की भूमिका की जांच पूरी होने के बाद उन्हें भी दुराचार का दोषी माना गया है।

नतीजा

शालिनी शर्मा: रजिस्ट्रेशन रद्द + 50 हजार जुर्माना।

अशोक पाण्डेय: एक साल निगरानी में + चेतावनी।

दीपक कुमार: सभी आरोप फर्जी साबित, विभागीय जांच से क्लीन चिट।

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