बिजली विभाग में ट्रांसफॉर्मर फुंकने के बढ़ते मामलों ने आखिरकार पावर कॉरपोरेशन चेयरमैन डॉ. आशीष कुमार गोयल को भड़का दिया। समीक्षा बैठक में उन्होंने दो अधीक्षण अभियंताओं और एक अधिशासी अभियंता की ‘क्लास’ लगाकर सीधे एडवर्स एंट्री देने के आदेश जारी कर दिए।
बैठक में कई इंजीनियर बिना तैयारी पहुंच गए-और नतीजा? सीधा रिकॉर्ड में लाल निशान!
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“ट्रांसफॉर्मर डैमेज रुके-हर हाल में!”
समीक्षा के दौरान चेयरमैन का संदेश साफ था—
“इतना पैसा देकर अनुरक्षण कराया गया और फिर भी ट्रांसफॉर्मर फुंक रहे हैं? अब जो बढ़ोतरी दिखेगी, जिम्मेदार सीधे चिह्नित होंगे और कार्रवाई काटकर मिलेगी।”
सभी बिजली कंपनियों को आदेश—
जहाँ ट्रांसफॉर्मर डैमेज, वहीं कार्रवाई।
बिल वसूली कम? रूलिंग टाइट!
चेयरमैन ने इंजीनियरों से कहा—
अब बिल वसूली पर भी रफ्तार बढ़ाओ।
और बैठकों में आना है तो
“पूरा होमवर्क करके।”
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किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर हुआ?
तुरंत नई पोस्टिंग जॉइन करो-नहीं तो कार्रवाई तय।
अधीक्षण अभियंताओं का आगामी मूल्यांकन इस बार
“बिजली बिल राहत योजना” की सफलता पर आधारित होगा।
1 दिसंबर से शुरू-बिजली बिल राहत योजना
नेवर पेड, लॉन्ग अनपेड और चोरी वाले मामलों के लिए यह बड़ी राहत योजना आ रही है। चेयरमैन ने कहा-
“विस्तृत प्रचार करो, ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता जोड़ो और बकाया वसूल करवाओ।”
1912: अब सबकुछ पेपरलेस

शिकायत?
कनेक्शन?
बिजली से जुड़ा कोई भी काम?
अब 1912 पर बिना कागज़—पूरी तरह पेपरलेस।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा भी सख्त—“ब्याज में 100% छूट मिलेगी, लेकिन काम जमीन पर दिखना चाहिए”
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ऊर्जा मंत्री ने समीक्षा बैठक में साफ कहा-“योजना बनेगी नहीं—लागू होगी। और जमीन पर दिखेगी।”
बैठक में MDs, मुख्य अभियंता, अधीक्षण अभियंता और सभी वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअली जुड़े।
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