अयोध्या सीएमओ को जान का खतरा ! संदिग्ध युवक की रेकी से मचा हड़कंप, डीएम को देंगे जानकारी

अयोध्या, एनआईए संवाददाता।

अयोध्या जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) डॉ. सुशील कुमार बानियान ने अपनी जान को खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को रुदौली क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एक संदिग्ध युवक ने उनकी रेकी की। युवक की गतिविधियां संदिग्ध होने और अस्पतालों पर हो रही सख्त कार्रवाई को देखते हुए उन्होंने मामले को गंभीर बताया है। सीएमओ इस संबंध में जिलाधिकारी (DM) को पूरी जानकारी देंगे और आवश्यक कार्रवाई की मांग करेंगे।

क्या है पूरा मामला?

शुक्रवार शाम को सीएमओ टीम के सदस्य, डिप्टी सीएमओ डॉ. राममणि शुक्ल, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. संदीप शुक्ल और डॉ. वेदप्रकाश त्रिपाठी निरीक्षण के बाद रुदौली के पास एक होटल पर चाय पी रहे थे। तभी आजमगढ़ नंबर प्लेट वाली बाइक पर सवार एक युवक वहां पहुंचा और पूछा कि इनमें से सीएमओ कौन हैं? जब चिकित्सकों ने बताया कि सीएमओ उनके साथ नहीं हैं, तो युवक नाराज हो गया और तेज़ी से चला गया।

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डॉक्टरों ने युवक और उसकी बाइक की फोटो मोबाइल में कैद कर ली। यह घटना सीएमओ डॉ. सुशील कुमार को बताई गई, जिसके बाद उन्होंने इस पूरी स्थिति को संदेहास्पद और जान के लिए खतरा बताया।

कार्रवाई से कई नाराज, तनाव का माहौल

सीएमओ के नेतृत्व में जिले में बिना लाइसेंस और बिना नवीनीकरण के चल रहे निजी अस्पतालों पर कार्रवाई जारी है। निरीक्षण में खामियां मिलने पर कई अस्पतालों को सील किया गया, वहीं कुछ का ऑपरेशन थिएटर बंद कराया गया है।

सीएमओ ने बताया कि इन कार्रवाइयों से कुछ अस्पताल संचालकों में गहरा रोष है, और कहासुनी की घटनाएं भी हो चुकी हैं। ऐसे में रेकी की यह घटना संदेह को और गहरा कर रही है।

सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान बोले:

अस्पतालों पर कार्रवाई के चलते कुछ लोग नाराज़ हैं। रेकी की इस घटना से जान का खतरा महसूस हो रहा है। मैं इस संबंध में जिलाधिकारी को अवगत कराऊंगा और उनके निर्देश पर आगे की पुलिस कार्रवाई करवाई जाएगी।

अब आगे क्या?

सीएमओ की ओर से डीएम को दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस को तहरीर दी जाएगी। अगर आवश्यक हुआ, तो संदिग्ध युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाएगी।

एआईए टिप्पणी

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सीएमओ द्वारा की जा रही कार्रवाई में अगर प्रशासनिक अधिकारियों को ही डर या धमकी का सामना करना पड़े, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए।

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