अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोलियम कंपनियों से पेट्रोल की कीमतों में तत्काल कटौती करने की मांग की है। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसका लाभ अब तक आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। ट्रम्प ने साफ शब्दों में कहा कि कंपनियां ग्राहकों से जरूरत से ज्यादा कीमत वसूल रही हैं और यदि जल्द दाम नहीं घटाए गए तो उन्हें गंभीर कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि कच्चे तेल की कीमत घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। इसके बावजूद अमेरिका में पेट्रोल की खुदरा कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जब कच्चा तेल सस्ता हो चुका है, तब उपभोक्ताओं से अधिक कीमत वसूलने का कोई औचित्य नहीं है।
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2.50 डॉलर प्रति गैलन तक कीमत लाने की अपील
ट्रम्प ने तेल कंपनियों से अपील की कि वे पेट्रोल की कीमतों को जल्द से जल्द करीब 2.50 डॉलर प्रति गैलन तक लाएं। उनका कहना है कि इससे आम लोगों को महंगाई से राहत मिलेगी और परिवहन लागत कम होने का असर अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों पर भी दिखाई देगा।
कंपनियों को दी सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि यदि तेल कंपनियां कच्चे तेल की कम कीमत का लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाती हैं तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत से ज्यादा कीमत वसूलना कानून के दायरे में जांच का विषय बन सकता है। ट्रम्प इससे पहले भी अमेरिकी न्याय विभाग को बड़ी तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जांच के निर्देश दे चुके हैं।
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मध्य-पूर्व तनाव के बाद बढ़ी थीं कीमतें
हाल के दिनों में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि स्थिति सामान्य होने के साथ तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
पेट्रोल की कीमत कई कारकों पर निर्भर
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल कच्चे तेल की कीमत कम होने से पेट्रोल के दाम तुरंत नहीं घटते। खुदरा कीमतों पर रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, कर, वितरण लागत और विपणन कंपनियों के मार्जिन का भी प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद उपभोक्ताओं को राहत मिलने में समय लग सकता है। फिलहाल ट्रम्प के बयान के बाद अमेरिकी तेल कंपनियों पर कीमतों में कटौती का दबाव बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि कंपनियां इस मांग पर क्या फैसला लेती हैं और इसका अमेरिकी उपभोक्ताओं पर कितना असर पड़ता है।





