2001 से चल रहा ‘कफ सिरप साम्राज्य’!

फर्जी फर्मों का जंगल, अफसरों का संरक्षण और सिंडिकेट का दुबई कनेक्शन

लखनऊ, NIA संवाददाता।
कोडीन कफ सिरप की तस्करी सिर्फ एक अपराध नहीं-एक सुव्यवस्थित उद्योग की तरह चल रहा था। STF की जांच में खुलासा हुआ कि लोगों की पहचान किराए पर लेकर फर्जी मेडिकल फर्में खड़ी की गईं, और उन्हीं के खातों से करोड़ों का लेनदेन बहाया गया।
कुछ पहचान-दाताओं की हालत इतनी सुधरी कि देखते ही देखते गाड़ियाँ, जमीन और रुतबा-सब सेट!

‘ये खेल नया नहीं, 2001 से खेला जा रहा है’

जांच में सामने आया कि यह गोरखधंधा दो-चार साल पुराना नहीं-2001 से बखूबी फल-फूल रहा है।
STF जब लोकेशन पर पहुंची तो ज्यादातर फर्में-
ताला, धूल, जाले… और रिकॉर्ड ZERO।

फर्जी फर्मों की फहरिस्त लंबी-
नीटी इंटरप्राइजेज, शिवम फार्म, सर्व फार्म, महाकाल मेडिकल, निशांत सर्ज, PPM मेडिकल, बाल मेडिकल…
नाम बहुत—काम कुछ नहीं, बस कागज़ी कारोबार

FSDA का ‘फ़्रेंडशिप मॉड्यूल’-अफसर ने ही मिलवाई मुलाकात

सबसे बड़ा झटका—
जिस अवैध कारोबार ने उत्तर भारत को हिला दिया, उसकी दोस्ती की नींव FSDA के एक सहायक आयुक्त ने रखी!
उसी ने शुभम-आसिफ-वसीम को मिलवाया, और वहीं से शुरू हुई
नेपाल-बांग्लादेश तक कफ सिरप की तस्करी की हाई-स्पीड सप्लाई लाइन।

दुबई में निवेश-तस्करी का पैसा विदेश में पार्क!

जांच में बड़ा विस्फोट-
सिंडिकेट ने पिछले चार साल में दुबई में तगड़ा निवेश किया।
फोटो, ट्रैवल रिकॉर्ड-सब कुछ STF के हाथ में है।
खुलासा होते ही शुभम और उसका पूरा खानदान सीधे दुबई में लैंड

जौनपुर का भूत-42 करोड़ का कफ सिरप खेल

जौनपुर की दो फर्मों ने अकेले
42 करोड़ की अवैध कफ सिरप सप्लाई की।
अब SIT गठित-क्योंकि यह ‘छोटी मछलियों’ का मामला नहीं रहा,
पूरी नदी गंदी निकली है।

मुख्य आरोपी हवा-पुलिस के हाथ सिर्फ खाली फाइलें

असिफ – फरार
वसीम – फरार
शुभम – फरार
रांची का फार्मा मालिक – फरार
STF जब अमित सिंह के पैतृक घर पहुँची,
कमरा मिला, अपराध नहीं।

राजनीति भी गरम-धनंजय सिंह का पलटवार

पूर्व सांसद धनंजय सिंह ने कहा कि राजनीतिक विरोधी इस केस को पब्लिक कैरेक्टर असैसिनेशन में बदलने पर तुले हैं।
उन्होंने CBI जांच की मांग करते हुए कहा-
झूठ पर ब्रेक, सच पर ऐक्सिलरेटर लगाया जाए।

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