लखनऊ, एनआईए संवाददाता।
यह पूरा घटनाक्रम यूपी की राजनीति और प्रशासनिक तंत्र के बीच खिंचाव को सामने लाता है। ईडी अफसर से राजनीति में आए और अब भाजपा विधायक बने राजेश्वर सिंह ने राजधानी लखनऊ की बदहाल स्थिति को लेकर सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिकायत की है।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं—
मुद्दा क्या है?
लखनऊ में जलभराव, टूटी सड़कों और जाम नालियों की समस्या।
नगर निगम और नगर विकास विभाग पर करोड़ों खर्च के बावजूद सुधार न होने का आरोप।
जनता को आवागमन की समस्या, बीमारियों का खतरा और राजधानी की छवि को धक्का।
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राजेश्वर सिंह की मांग
नगर निगम व नगर विकास विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा।
उच्च स्तरीय मॉनिटरिंग समिति का गठन (सिविल इंजीनियर, शहरी योजनाकार, जल प्रबंधन विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ)।
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दंडात्मक कार्रवाई।
लखनऊ के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना, जिसमें GIS मैपिंग और वैज्ञानिक वर्षा-जल निकासी हो।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह मामला सीधे नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा के विभाग से जुड़ा है।
अरविंद शर्मा पहले ही विवादों में रहे—उन्होंने कहा था कि बिजली विभाग ने उन्हें बदनाम करने की सुपारी ले ली है।
अब उन्हीं के विभाग पर राजेश्वर सिंह ने सवाल उठाए हैं।
अतिरिक्त मुद्दे
लखनऊ–कानपुर Elevated Highway के निर्माण की गति बढ़ाने और लोगों को हो रही दिक्कतें दूर करने की मांग।
NCR की तर्ज पर State Capital Region (SCR) बनाने और उसकी बोर्ड बैठक कराने का अनुरोध।
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पॉलिटिकल सिग्नल
राजेश्वर सिंह ने सीएम योगी संग मुलाकात की तस्वीर एक्स (Twitter) पर डालकर संदेश दिया कि वो जनहित की समस्याओं पर सक्रिय हैं।
लेकिन यह दबाव भाजपा शासित नगर निगम और अरविंद शर्मा पर सवाल खड़े करता है, जो पार्टी के भीतर खींचतान का संकेत भी है।
कुल मिलाकर, यह सिर्फ गड्ढों और नालों का मुद्दा नहीं, बल्कि राजधानी लखनऊ की प्रशासनिक नाकामी और भाजपा के भीतर शक्ति-संतुलन की राजनीति का भी आईना है।
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