मुरादाबाद/लखनऊ, NIA संवाददाता।
भारत के लोकतंत्र को लेकर बड़ा बयान देते हुए असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने कहा कि भारत में लोकतंत्र की जड़ें वैदिक काल से ही अंकुरित हैं। उन्होंने लोकतंत्र को केवल शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन पद्धति बताया।
वे तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस “Building Democracy Through Law and Information” में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि वैदिक काल में राजा भी धर्म और न्याय के आधार पर शासन करता था। उन्होंने वेदों का उल्लेख करते हुए कहा—“धर्मो रक्षति रक्षतः”, यानी जो धर्म और न्याय की रक्षा करता है, वही सुरक्षित रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रजा का सुख ही शासक का सुख होता है, जो भारतीय लोकतांत्रिक सोच का मूल सिद्धांत है।

संविधान और लोकतंत्र पर जोर
राज्यपाल ने भीमराव आंबेडकर को याद करते हुए कहा कि संविधान की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसे लागू करने वाले लोग कितने अच्छे हैं।
उन्होंने कहा:
कानून किसी भी पद या व्यक्ति से ऊपर है
लोकतंत्र में अंतिम व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है
कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी है
युवाओं और शिक्षा की अहम भूमिका
राज्यपाल ने नरेन्द्र मोदी द्वारा लागू नई शिक्षा नीति (NEP-2020) की सराहना करते हुए कहा कि इससे युवाओं में कौशल विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र बताते हुए कहा कि युवा ही देश के भविष्य को दिशा देंगे।
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सम्मेलन की प्रमुख झलकियां
लॉ कॉलेज में मूट कोर्ट का उद्घाटन
जर्नल और पुस्तक The Dory Paradox का विमोचन
स्काउट एंड गाइड द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर
अतिथियों का सम्मान और पौधरोपण
विशेषज्ञों की राय
की-नोट स्पीकर प्रो. राज कुमार मित्तल ने कहा कि संविधान का मूल ढांचा अपरिवर्तनीय है और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरूक नागरिक जरूरी हैं। वहीं प्रो. वीके जैन ने कहा कि सूचना (Information) ही लोकतंत्र की असली कुंजी है।
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