मुरादाबाद में BJP में बगावत! अपने ही मेयर के खिलाफ उतरे 16 पार्षद, महिला पार्षदों ने भी लगाए गंभीर आरोप

लखनऊ/मुरादाबाद NIA संवाददाता।

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। ताजा मामला मुरादाबाद से सामने आया है, जहां भाजपा के 16 पार्षदों ने पार्टी के महापौर विनोद अग्रवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर मेयर पर अभद्र व्यवहार और अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगाए हैं।

सबसे खास बात यह है कि शिकायत करने वालों में महिला पार्षद भी शामिल हैं। उनका आरोप है कि महापौर महिला जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में भी अनुचित और असंसदीय भाषा का प्रयोग करते हैं, जिससे वे नगर निगम कार्यालय आने में असहज महसूस करती हैं।

सड़क पर उतरे भाजपा पार्षद

शिकायत भेजने से पहले भाजपा पार्षदों ने मुरादाबाद के कपूर कंपनी चौराहे पर एकजुट होकर मेयर के खिलाफ प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है, बल्कि महापौर की ओर से पार्टी पार्षदों के साथ अभद्र व्यवहार की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।

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दलित पार्षद का बड़ा आरोप

भाजपा के दलित पार्षद प्रशांत कुमार ने महापौर पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि कार्यकारिणी की बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर ने उन्हें धमकी देते हुए कहा कि उनके वार्ड की रेलवे लाइन पर ही उनका अंजाम होगा।

यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पार्टी के भीतर अनुशासन और जनप्रतिनिधियों के सम्मान का भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।

मेयर ने दी सफाई

महापौर विनोद अग्रवाल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संगठन स्तर पर मामला सुलझ चुका है और कोई विवाद शेष नहीं है। उनका कहना है कि वे गलत बात का समर्थन नहीं करते, इसलिए कुछ लोग उनका विरोध करते हैं।

राजनीतिक मायने

मुरादाबाद में भाजपा के भीतर खुलकर सामने आया यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय निकायों की कार्यशैली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपने ही महापौर के खिलाफ 16 पार्षदों का एकजुट होना स्थानीय राजनीति में बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें भाजपा संगठन पर हैं कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या कोई अनुशासनात्मक कदम उठाया जाता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

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