कहते हैं भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं। लेकिन अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों ने ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है कि अब भगवान के दरबार में चढ़ाए गए दान की हिफाजत के लिए सरकार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) उतारनी पड़ गई है। जिस दानपात्र में श्रद्धालु अपनी आस्था समर्पित करते हैं, अब उसी के हिसाब-किताब की पड़ताल अफसरों की टीम कर रही है।
सोमवार को तीन सदस्यीय एसआईटी मंदिर परिसर पहुंची। आम श्रद्धालुओं की तरह दर्शन नहीं किए, बल्कि सीधे उस जगह पहुंच गई जहां चढ़ावे की गिनती होती है। इसके बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से घंटों बंद कमरे में बातचीत हुई। कमरे के बाहर लोग इंतजार करते रहे और अंदर सवालों की परतें खुलती रहीं।
पहले हिसाब, फिर जवाब
एसआईटी ने सबसे पहले यह समझने की कोशिश की कि आखिर चढ़ावा आता कैसे है, गिना कैसे जाता है और सुरक्षित कहां रखा जाता है। इसके लिए कई दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। यानी अब बात केवल आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि कागजों और रिकॉर्ड की भी पड़ताल होगी।
दिलचस्प बात यह रही कि मंदिर की व्यवस्थाओं में सक्रिय रहने वाले कुछ प्रमुख लोगों को पहले दिन जांच प्रक्रिया से दूर रखा गया। लगता है एसआईटी भी जानती है कि अगर सब एक साथ बोलेंगे तो सच कम और शोर ज्यादा सुनाई देगा।
श्रद्धालु चढ़ावा चढ़ाते रहे, सवाल बढ़ते रहे
रामलला के दर्शन करने आने वाला भक्त शायद यह सोचकर दान करता है कि उसका अंश धार्मिक कार्यों में लगेगा। लेकिन अब जांच एजेंसियों को यह पता लगाना है कि कहीं उस आस्था पर किसी की नजर तो नहीं लग गई। सवाल यह भी है कि अगर चोरी हुई तो कब से हो रही थी, कैसे हो रही थी और आखिर किसकी नजरों के सामने हो रही थी।
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एसआईटी के सामने चुनौती छोटी नहीं है। उसे यह तय करना है कि मामला केवल आपराधिक है या फिर व्यवस्था में ऐसी खामियां हैं, जिनकी वजह से आस्था के नाम पर जमा धन सुरक्षित नहीं रह सका।
मंदिर में अब ‘ऑडिट मोड’
सूत्रों की मानें तो जांच टीम दो स्तर पर काम करेगी। पहला, यह पता लगाने के लिए कि चोरी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। दूसरा, यदि गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार कौन हैं और भविष्य में ऐसी नौबत दोबारा न आए, इसके लिए क्या व्यवस्था हो।
यानी राम मंदिर में अब केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि हिसाब-किताब का भी दौर चल रहा है।
नजर अब SIT की रिपोर्ट पर
एसआईटी को एक सप्ताह में प्रारंभिक और 15 दिनों में विस्तृत रिपोर्ट सरकार को देनी है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि जांच में क्या निकलकर सामने आता है। क्योंकि मामला सिर्फ पैसे का नहीं, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है।
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