50–60% डिस्काउंट की दवाएं MRP पर खरीदवाईं-कमीशन साबित, रिपोर्ट तैयार… लेकिन कार्रवाई आज तक ZERO!
लखनऊ, NIA संवाददाता।
अयोध्या के जिला होम्योपैथी चिकित्साधिकारी पर जो आरोप लगा है, वह सिर्फ अनियमितता नहीं-सीधा सरकारी धन की लूट है।
खुलासा हुआ कि जिन दवाओं पर बाजार में आधे से भी ज्यादा डिस्काउंट मिल रहा था, वही दवाएं विभाग ने फुल MRP पर खरीदीं, ताकि कमीशन सेटिंग की मोटी कमाई जेब में उतर सके।
और सबसे बड़ा सवाल-
जांच में कमीशन साबित होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
किसकी छतरी तले बच रहा अधिकारी?

मरीज को सस्ता, विभाग को महंगा – ‘डिस्काउंट गायब, कमीशन हाज़िर’ मॉडल उजागर!
सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश तिवारी ने जिम्मेदारी से मामला पकड़ा।
उन्होंने वही दवाएं बाजार से खरीदीं-
जहाँ आम आदमी को 60% तक डिस्काउंट मिला, वहीं विभाग ने वही दवाएं MRP पर खरीदीं।
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अर्थ साफ है-
डिस्काउंट दवा दुकानें जनता को राहत दे रहीं थीं…
और विभाग MRP देकर किसी को ‘राहत’ दे रहा था।
जांच रिपोर्ट में सीधा आरोप—‘दवाएं टुकड़ों में खरीदीं ताकि टेंडर न हो’
सीएमएस डॉ. संगीता भाटिया ने जांच में पाया:
दवाएं जानबूझकर टुकड़ों में खरीदी गईं
उद्देश्य साफ-टेंडर से बचना
बेक्सोन्स कंपनी 50–60% डिस्काउंट देती है
विभाग ने वही दवाएं एमआरपी पर खरीदीं
वेंडर से कोई रेट बातचीत नहीं
10 लाख रुपये से अधिक कमीशन की आशंका
रिपोर्ट 30 नवंबर 2024 को भेज दी गई थी।
लेकिन कार्रवाई?
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कागज़ पर सिर्फ सन्नाटा।
ऊपरी अधिकारियों पर भी सवाल -“आरोपी को बचाने के लिए खेल चल रहा है”
आरोप ये भी है कि विभाग के ही कुछ बड़े अधिकारी, जिस पर उंगली उठनी चाहिए थी,
उसी उंगली को मोड़कर उल्टा बचाव करने में जुटे हैं।
अब मामला आयुष मंत्री और सीएम योगी तक पहुंच चुका है।
आरोपित अधिकारी की सफाई-“रिपोर्ट बदले की आग में बनी”
डॉ. अजय कुमार का कहना है-
जांच अधिकारी निलंबित थीं
मैंने उन्हें नोटिस दिया था, इसलिए नाराज होकर रिपोर्ट बनाई
“खरीद टेंडर से हुई, सब वैध है”
“कुछ डॉक्टर OPD में बैठना नहीं चाहते, प्रॉपर्टी डीलिंग करते हैं—इसीलिए मेरे खिलाफ साजिश है” मतलब-
आरोप भी वहीं के, बचाव भी वही पुराना—‘सब मुझे फँसाना चाहते हैं’।
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आयुष विभाग: “मामला पुराना, फाइलें देखकर कार्रवाई करेंगे”
विशेष सचिव आयुष हरिकेश चौरसिया बोले—
“दस्तावेज देख रहे हैं, जल्द कार्रवाई होगी।”
यानी
कमीशन साबित, रिपोर्ट तैयार, शिकायत पक्की…
लेकिन कार्रवाई का टाइमटेबल अभी भी ‘जल्द’ नामक अंधेरी सुरंग में।
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