कोर्ट कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का फैसला बीएमसी आयुक्त भुषण गगरानी को भारी पड़ गया। बॉम्बे हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद आयुक्त को सार्वजनिक रूप से अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी। अदालत ने साफ कहा कि बीएमसी आयुक्त को अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश शिरी चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की पीठ ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप किस प्रावधान के तहत अदालत कर्मचारियों को समन कर रहे हैं? आपके पास ऐसी कोई शक्ति नहीं है।” कोर्ट ने आयुक्त को चेतावनी देते हुए कहा कि वे “खुद को बचाएं” और चुनाव के लिए अन्य स्रोतों से कर्मचारियों की व्यवस्था करें।
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बीएमसी आयुक्त की ओर से पेश वरिष्ठ वकील रवि कदम ने कोर्ट में माना कि अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर बुलाना एक प्रशासनिक भूल थी। उन्होंने बताया कि सभी विवादित पत्र वापस ले लिए गए हैं और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोर्ट स्टाफ को अब किसी भी स्थिति में समन न किया जाए।
गौरतलब है कि 22 दिसंबर 2025 को बीएमसी आयुक्त ने मुंबई की अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर तैनात करने के आदेश जारी किए थे। जबकि उसी दिन हाईकोर्ट प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि अदालत कर्मचारियों को चुनावी कार्य से छूट प्राप्त है।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में याद दिलाया कि संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत अधीनस्थ अदालतों और उनके कर्मचारियों पर पूर्ण नियंत्रण हाईकोर्ट का होता है। वर्ष 2008 से ही अदालत कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने का प्रशासनिक फैसला लागू है।
अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जाएगी।
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