STF ने लखनऊ में 14 साल पुराने ओवरलोडिंग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया; एआरटीओ–पीटीओ पर एफआईआर

लखनऊ, NIA संवाददाता।

एसटीएफ ने राजधानी में चल रहे ओवरलोडिंग सिंडिकेट का बड़ा भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में दलाल अभिनव पांडेय की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह के रिकॉर्ड मिले, उसने परिवहन विभाग की अंदरूनी दशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दलाल के पास से मिला रजिस्टर इस बात का खुलासा करता है कि कैसे वर्षों से ट्रकों को बिना नियम के क्लियर कराया जा रहा था।

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जांच में सामने आया कि कई अधिकारियों के नाम रजिस्टर में साफ लिखे हैं। इसमें एआरटीओ (प्रशासन) राजू बंसल, पीटीओ मनोज भारद्वाज के अलावा कई कर्मचारियों से जुड़े भुगतान का विवरण भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि भगवती रेजेंसी के कमरे से बरामद नोटबुक में 14 साल का हिसाब दर्ज है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेटवर्क कितनी गहराई तक फैला था।

दलाल द्वारा बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप ‘अंडरलोड 01’ से भी अहम सूचना मिली है। इस ग्रुप में टीम के सदस्य वाहनों की लोकेशन, ओवरलोडिंग की सूचना और क्लियरेंस का अपडेट साझा करते थे। कई चैट डिलीट की गई हैं, लेकिन जो डेटा मिला है वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए काफी है।

टीम ने यह भी पाया कि निलंबन की कार्रवाई के बावजूद यह नेटवर्क जारी रहा। अधिकारियों के ट्रांसफर और निलंबन के बीच भी ओवरलोडिंग रोकने का कोई असर नहीं दिखा। रजिस्टर में पुराने अधिकारी, पूर्व विभागीय कर्मचारी और कुछ निजी लोगों के नाम भी आने का अनुमान है।

एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि प्रतिदिन 1500 से अधिक ओवरलोड ट्रक पास होने के संकेत मिले हैं। इतनी बड़ी संख्या बताती है कि मामला सिर्फ कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं, बल्कि संगठित तरीके से चलाया जा रहा था।

फिलहाल, परिवहन विभाग के कई अधिकारी जांच के दायरे में हैं। गिरफ्तार दलाल से पूछताछ जारी है और डिजिटल फॉरेंसिक टीम मोबाइल व चैट डेटा की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे विश्लेषण आगे बढ़ेगा, और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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