Friday , September 30 2022

उत्तर प्रदेश का होगा नया जेल कानून, मंत्री के अनुमोदन का इंतजार

पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के पत्र का सरकार ने लिया संज्ञान


लखनऊ।

उत्तर प्रदेश का जेल कानून नये सिरे से होगा। संशोधित प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। अब केवल विभागीय मंत्री के अनुमोदन का इंतजार है।
बीते दिनों पूर्व आईपीएस अमिताभ ने ठाकुर ने सरकार को पत्र भेजकर अवगत करवाया था कि जेल मैन्युअल के तमाम प्रावधान भारतीय संविधान तथा दांडिक विधि के खिलाफ हैं. प्रस्तर 168 तो सजायाफ्ता फौजियों को यूनाइटेड किंगडम भेजे जाने की बात करता है तथा ब्रिटिश कब्ज़ा, भारत मंत्री तथा हिज मेजेस्टी आर्डर जैसे शब्दों तक का प्रयोग करता है. कई प्रस्तर में यूरोपियन तथा एंग्लो-इंडियन कैदियों का विशेष उल्लेख है. कई प्रस्तर में मद्रास सरकार, कलकत्ता प्रेसीडेंसी, बॉम्बे सरकार जैसे शब्दों का प्रयोग है जो अब अस्तित्व में नहीं हैं. कई प्रस्तर उत्तराखंड के इलाके से संबंधित हैं. प्रस्तर 719 में जातीय पक्षपात तक तो अनुमति है जो संविधान के पूर्णतया विपरीत है. कई प्रस्तरों में कोड़े बरसाने, बेड़ी, हथकड़ी, क्रॉस बार जैसी सजा का जिक्र है जिन्हें अब सजा के रूप में हटा दिया गया है. इसी प्रकार डाइट या अन्य सहयोग धनराशि रु० 2 प्रति दिन तथा 37 पैसे प्रति किलोमीटर जितना कम रखा गया है. यहाँ तक कि मेडकल अफसर को रु० 10 जेल अलाउंस की व्यवस्था है, जिसका सरकार ने संज्ञान लिया है। एस के मैत्रेय, डीआईजी मुख्यालय द्वारा प्रेषित पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार की अपेक्षा के अनुसार जेल मैन्युअल में संशोधन हेतु मॉडल प्रिजन मैन्युअल 2003 तथा 2016 के साथ उत्तर प्रदेश जेल सुधार समिति 1946, अखिल भारतीय जेल सुधार समिति 1980-83 तथा कपूर कमिटी 1987 के साथ सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट तथा एनएचआरसी के तमाम निर्देशों को समाहित करते हुए संशोधित जेल मैन्युअल 2021 का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जो वहां लंबित है तथा मंत्री के अनुमोदन के बाद प्रभाव में आएगा.