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जुगलबंदी तो खूब की,पर कोई गुल नहीं खिला सके अखिलेश

मौका न सधने पर बिखर गई अखिलेश- राहुल और अखिलेश- मायावती की जोड़ी

लखनऊ। येन-केन प्रकारेण सत्ता हासिल करने के लिए हाल के वर्षों में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अधिक अखिलेश यादव ने जुगलबंदियाँ तो खूब कीं, पर कोई गुल नहीं खिला सके। इसकी वजहें रही है। इस तरह के बेमेल गठबंधन के पीछे अखिलेश का मतलब अपना उल्लू सीधा करना था। पर दूध से जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है कि तर्ज पर जनता उनकी मंशा को भांप चुकी जनता ने उनके अरमानों पर पलीता लगा दिया। मौका न सधने पर ये गठबंधन स्थायी नहीं हो सके। कभी साथ रहने वाले इस चुनाव में आमने-सामने हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते विधानसभा चुनावों में अखिलेश-राहुल और प्रियंका- डिंपल की जोड़ी चुनाव मैदान में थी। फिर लोकसभा चुनावों में अखिलेश और मायावती की जोड़ी ने मिलकर चुनाव लड़ा। परन्तु इन जोड़ियों की जुगलबंदी सूबे की राजनीति में कोई गुल नहीं खिला पायी। यहीं नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति के चलते जब इनकी दाल नहीं गली तो ये जोड़ियां भी देखते-देखते बिखर गई। अब अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मायावती तीनों ही एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। यूपी की राजनीति में हुए इस फेरबदल के चलते कभी एक दूसरे के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले इन नेताओं को लेकर प्रदेश की जनता क्या सोचती है? यह तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चलेगा, लेकिन अभी तो इन दलों के नेता एक दूसरे से ही लड़ रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इन नेताओं के आपसी संघर्ष का लाभ प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को मिलेगा। राज्य की जनता का भी कुछ ऐसा ही मत है, जिसके चलते ही रह चुनावी सर्वे में भाजपा को विपक्षी दलों से बेहतर बताया जा रहा है।

आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर जनता के बीच अखिलेश -राहुल और अखिलेश -मायावती की बिखरी जोड़ियों को जनता की हो रही चर्चाओं में मायावती के कांग्रेस और सपा के खिलाफ किए गए कमेंट के मतलब निकाले जा रहे हैं। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने कुछ दिनों पहले कांग्रेस तथा सपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि यूपी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस जनता से लोक लुभावन वादे कर रही है लेकिन कांग्रेस की कथनी पर विश्वास करना मुश्किल है। कांग्रेस ने चुनावी छलावे के तहत भाजपा और सपा की तरह ही अनेकों प्रकार के लोक लुभावन वादे करने शुरू कर दिए हैं, जिसके तहत इस पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनने पर उत्तीर्ण छात्राओं को स्मार्टफोन व स्कूटी देने की बात कही है, लेकिन मूल प्रश्न यह है कि इनपर विश्वास कौन व कैसे करे। कांग्रेस की राजस्थान व पंजाब में सरकार है तो क्या इन्होंने ऐसा कुछ वहाँ करके दिखाया है जो लोग उनकी बातों पर यकीन करे लें। इसी तरह प्रियंका गांधी ने सपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अखिलेश यादव और उनकी पार्टी केवल चुनाव के दौरान ही क्यों एक्टिव होती है? पिछले पांच सालों में अखिलेश कहां थे जब कांग्रेस सड़कों पर लड़ रही थी? 18,500 से ज्यादा कांग्रेस कार्यकर्ता जेल में थे। हमारे अध्यक्ष कोरोना काल के दौरान 28 दिनों के लिए जेल में थे। प्रियंका के इस आरोप का अखिलेश यादव ने भी जवाब दिया, अखिलेश यादव ने कहा कि जनता कांग्रेस को नकार देगी और उन्हें आगामी चुनावों में शून्य सीटें मिलेंगी।

मायावती, अखिलेश और प्रियंका गांधी के ऐसे आरोप यूपी की राजनीति में गर्मी ला रहे है। और अब यह सवाल उठ रहा है कि अलग -अलग एक दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रहे सपा, बसपा तथा कांग्रेस के नेता इन चुनावों में क्या गुल खिलाएंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जनता के हित में किए गए विकास कार्यों को लेकर जनता के बीच विपक्षी दलों के नेता क्या तर्क देंगे? क्योंकि चुनावी सर्वे में भाजपा के पहले स्थान पर आने की मुख्य वजह, पौने पांच वर्षों में योगी सरकार द्वारा हर वर्ग के लिए किए गए कार्यों को बताया जा रहा है। जिसके अनुसार राज्य की बेहतर हुई क़ानून व्यवस्था के कारण राज्य में रिकार्ड निवेश हुआ, इसकेअलावा किसानों की कर्ज माफी, गन्ना किसानों को उनके गन्ना मूल्य का समय से भुगतान मिलाना, किसान सम्मान निधि की क़िस्त समय से किसानों को मिलाना, साढ़े चार लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिलना भी भाजपा को चुनावी सर्वे में विपक्ष से ऊपर रख रही है। इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा स्नातक तक बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा देने के साथ मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के तहत क्रमश : 10 लाख और 1.80 करोड़ बालिकाओं को लाभांवित किया जाना। नौकरियों में भी सरकार ने महिलाओं को प्राथमिकता देना। इस क्रम में 01 लाख से अधिक महिलाओं को सरकारी नौकरी में लिया जाना। करीब 56 हजार बैंकिंग करेस्पोंडेन्स सखियों की नियुक्ति किया जाना। 30 लाख 34 हजार निराश्रित महिलाओं को 1000 रुपए प्रतिमाह पेंशन दिया जाना। प्रदेश में दो करोड़ 94 लाख से अधिक शौचालय (इज्जतघर) का निर्माण करवाना और प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना में गरीब महिलाओं को 1 करोड़ 67 लाख निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरित किया जाना। ये प्रदेश सरकार की कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिन्हें गांव से लेकर शहर तक में पसंद किया जा रहा हैं। जिसके चलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के खिलाफ अलग-अलग चुनाव लड़ रहे अखिलेश यादव, मायावती और राहुल तथा प्रियंका गांधी के लिए आगामी चुनाव एक कड़ी चुनौती है।