Friday , September 30 2022

मौका परस्त स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह, धर्म सिंह जैसे बीजेपी के बागी न घर के रहे, न घाट के

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक बार फिर सत्ता में आने की तस्वीर साफ होने के साथ ही भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्य का साथ देकर दलबदल करने वालों के लिए यह फैसला मंहगा साबित हुआ है।

चुनाव से ठीक पहले भाजपा को झटका देते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर चुनावी दंगल में उतरे स्वामी प्रसाद मौर्य खुद कुशीनगर की फाजिलनगर सीट से चुनाव हार गये। खुद को नेवला बताकर भाजपा को तबाह करने का दावा करने वाले मौर्य के साथ सपा में गये पूर्व मंत्री डा धर्म सिंह सैनी भी नकुड़ सीट पर भाजपा के मुकेश चौधरी से मात्र 315 मतों से चुनाव हार गये।

इनके साथ ही मंत्री पद छोडने वाले दारा सिंह चौहान ने घोसी विधानसभा सीट पर सपा के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज करते हुए भाजपा के विजय राजभर को 22 हजार वोट से हराया। बेहट विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक रहे नरेश सैनी का दलबदल कर भाजपा में जाना जनता को रास नहीं आया। भाजपा उम्मीदवार के रूप में सैनी को सपा के उमर अली खान ने हरा दिया।

भाजपा के विधायक रह चुके ब्रजेश कुमार प्रजापति ने भी स्वामीप्रसाद मौर्य के साथ सपा का दामन थामने का खमियाजा आज भुगता। बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट से सपा के उम्मीदवार बने ब्रजेश को भाजपा के प्रत्याशी रामकेश निषाद ने 28,425 वोटो से मात दी है। ब्रजेश कुमार विधायक पद छोड स्वामीप्रसाद मौर्य के साथ समाजवादी पार्टी में चले गये थे और सपा ने तिंदवारी से उन्हें उम्मीदवार बनाया था।

भाजपा छोड़कर सपा गयी विधायक माधुरी वर्मा, नानपारा सीट पर अपना दल (एस) के रामनिवास से 12 हजार वोट से हार गयीं। हालांकि बरेली की मेयर सुप्रिया ऐरन कांग्रेस छोड़कर सपा उम्मीदवार के रूप बरेली कैंट सीट पर फिलहाल मुकाबले में बनी हुयी हैं। कांग्रेस का टिकट नकार कर सपा में शामिल हुयी एरन 665 वोट से भाजपा के संजीव अग्रवाल से आगे चल रही हैं।

अपना दल छोड़कर आरएलडी में शामिल हुए अवतार सिंह भढाना भी नोएडा की जेवर सीट से चुनाव हार गये हैं। स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा छोड़ सपा का दामन थामने वाले भगवती सागर भी घाटमपुर सीट पर अपना दल (एस) के उम्मीदवार सरोज से चुनाव हार गये हैं।

मौर्य के साथ भाजपा छोड़कर सपा में गये रोशनलाल वर्मा भी तिलहर सीट पर भाजपा के सलोना कुशवाहा से 13 हजार वोट से मात खा चुके हैं। इनके अलावा सपा में गये दिग्विजय नारायण चौबे भी खलीलाबाद से भाजपा के अंकुर तिवारी से नौ हजार वोट से पीछे चल रहे हैं।

चुनाव से पहले दलबदल करने वालों में बसपा छोड़कर सपा में गये विधायक विनय शंकर तिवारी भाजपा के राजेश त्रिपाठी से 21 हजार वोट से पीछे चल रहे हैं। बसपा छोड़ने वालों में गुड्डू जमाली मुबारकपुर सीट से एआईएमआईएम उम्मीदवार के रूप में 6 हजार से अधिक मतों से सपा के अखिलेश यादव से पीछे चल रहे हैं। बसपा श्रावस्ती सीट से बसपा के विधायक मोहम्मद असलम रायनी भी सपा का दामन थाम कर चुनावी नैया पार नहीं लगा पाये हैं। रायनी को भाजपा के रामफेरन ने हरा दिया।