Friday , September 30 2022

पुलिस पर झूठे आरोप लगाने लगा विपक्ष

  • सिद्धार्थनगर की घटना से विपक्ष का झूठ हुआ उजागर
  • विपक्षी नेताओं का रुख पुलिस के मनोबल को क्षीण करेगा : एपी माहेश्वरी
  • यूपी की कानून व्यवस्था का माडल देश भर में लोकप्रिय : प्रशांत कुमार
  • संगठित अपराध को यूपी में पूरी तरह किया गया समाप्त : प्रशांत कुमार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सक्रिय विपक्षी दल विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सदमे में हैं. इस स्थिति से बाहर आने और जनता के बीच अपनी मौजूदगी को दर्ज करने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा), कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) जैसे दल अपराध की घटनाओं को लेकर प्रदेश सरकार पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. चाहे अखिलेश यादव हो या भाकपा (माले) के नेता अपराध की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरने में जुट जाते हैं. सिद्धार्थनगर की घटना में विपक्षी दलों ने प्रदेश पुलिस पर अनर्गल आरोप लगाए, जो झूठे साबित हुए. लेकिन विपक्षी नेताओं का रुख बदला नहीं. अब राज्य में विपक्षी नेता घटना की पूरी सच्चाई जाने बिना ही ट्वीट करने और मीडिया को बयान देने की सियासत करने में जुटा है. विपक्ष के इस रवैये को प्रदेश पुलिस की डीजीपी रह चुके अधिकारी अनुचित बता रहे हैं. इन रिटायर्ड पुलिस अफसरों का कहना है कि विपक्ष बड़े नेताओं को अनर्गल आरोप लगाकर पुलिस की छवि पर दाग लगाने की प्रवृति से बचना चाहिए. ताकि समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को जनता का समर्थन मिलता रहे.

विधानसभा चुनावों के बाद से विपक्षी नेताओं ने प्रदेश सरकार को घेरने के लिए जो रुख अपनाया है, उसका आकलन करते हुए रिटायर्ड पुलिस अफसरों ने यह कहा है. इस अफसरों का यह आकलन बीते दो माह में यूपी में अपराध ही हुई घटनाओं और उसके बाद विपक्षी नेताओं के बयानों पर आधारित है. राज्य के डीजीपी रहे चुके और वर्तमान में राज्यसभा सांसद बृजलाल हो या सीआरपीएफ के डीजी रहे डा.एपी माहेश्वरी अथवा डीजी होमगार्ड रहे सूर्य कुमार शुक्ला. ये सभी अधिकारी कहते हैं कि समाजवादी पार्टी के मुखिया ने बीते दो माह में सबसे अधिक ट्वीट अपराध की घटनाओं को लेकर ही किये हैं. इसी प्रकार भाकपा (माले) के नेताओं को भी सरकार को घेरने के लिए अपराध की घटनाओं का ही सहारा लिया है. भाकपा (माले) के नेताओं ने तो प्रदेश की सरकार और पुलिस पर झूठा आरोप लगाने में भी संकोच नहीं किया. सिद्धार्थनगर में गत 14 मई को घटी घटना इसका सबूत है.

इस घटना में जितेंद्र यादव नाम के एक व्यक्ति ने गोकशी में लिप्त लोगों को पुलिस की पकड़ से बचाने के लिए गोली चलाई थी. जिसके चलते अकबर अली की पत्नी की गोली लगने में मृत्यु हो गई. पुलिस ने जितेंद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया. जितेंद्र ने अपना जुर्म भी कबूल कर लिया. इसके बाद भी भाकपा (माले) ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा कि पुलिस की टीम ने अकबर अली की पत्नी को गोली मारी. एक राजनीतिक दल का पुलिस पर लगाए गए इस आरोप को रिटायर पुलिस अफसर उचित नहीं मानते. यह अधिकारी कहते हैं कि राजनीतिक दल अपराध की घटनाओं पर बयान दें, पर वह बयान मर्यादित हो. अपराधियों की मदद करने वाला ना हो. झूठा ना हो. ताकि पुलिस जल्द से जल्द अपराधिक घटना को अंजाम देने वाले व्यक्ति को पकड़ सके. यह करने के बजाए अब अपराध की घर घटना पर विपक्षी नेता राजनीति करने लगे हैं. एपी माहेश्वरी कहते हैं कि विपक्षी नेताओं का राजनीतिक हितों से तुष्टीकरण की राह अपनाना पुलिस के मनोबल को क्षीण भी नहीं करेगा बल्कि गुमराह भी करेगा.

राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार अपराध की घटनाओं पर विपक्षी दलों के नेताओं के बयानों को लेकर सीधे कुछ नहीं कहते. उनका कहना है कि यूपी की क़ानून व्यवस्था को माडल देश भर में सराहा जा रहा हैं. राज्य में पांच वर्षों में एक भी दंगा नहीं हुआ है. संगठित अपराध को यूपी में समाप्त कर दिया गया है. मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, सुन्दर भाटी सहित 22,259 अपराधियों के विरूद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही की है, साथ ही 1128 करोड़ रुपए की संपत्ति भी जब्त की गई है. ऐसे में राजनीतिक दलों के नेता पुलिस पर जो अनर्गल आरोप लगा रहे हैं. इसमें कोई सच्चाई नहीं है. सिद्धार्थनगर की घटना पर विपक्षी दलों के लगाए गए आरोप अनर्गल साबित हुए हैं. जिस अपराधी इन वहां गोली चलाई थी उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है. ऐसी ही कार्रवाई अपराध के अन्य घटनाओं में की गई है.