Thursday , October 6 2022

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के नियमावली की मांग दोहराई

– न्यूनतम वेतन तय करने की मांग भी किया

– कर्मचारियों को दी जाए 60 वर्ष तक सेवा की गारंटी

– 5 वर्ष के बाद किया जाए नियमित पदों पर समायोजन

– नियमित पदों पर नियुक्तियों में आउटसोर्स कर्मचारियों को दी जाए प्राथमिकता

लखनऊ। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य के बारे में चिंता व्यक्त किया है।

उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि शासन के कार्मिक विभाग ने 10 दिसंबर को उत्तर प्रदेश के शासकीय विभागों एवं उसके अधीनस्थ संस्थाओं द्वारा आउटसोर्सिंग पर रखे गए व्यक्तियों के पारिश्रमिक भुगतान समय से किए जाने के संबंध में एक शासनादेश जारी किया है, परंतु यह शासनादेश आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, वेतन संरक्षण,  उनका मानदेय बढ़ाए जाने तथा उनका समायोजन किए जाने की गारंटी नहीं देता है ।

यह शासनादेश कर्मचारियों के लिए सिर्फ एक लॉलीपॉप है। इससे कर्मचारियों का कुछ भी भला नहीं हो रहा है। सेवा प्रदाता को बांधने की कोशिश जरूर की गई है परंतु इससे आउटसोर्स कर्मचारियों को कोई लाभ नहीं हो रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नियमावली बनाए जाने ,उनका न्यूनतम वेतन  21000 निर्धारित किए जाने ,5 वर्ष की सेवा कर चुके आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित पदों पर समायोजित किए जाने, सामूहिक बीमा एवं दुर्घटना बीमा का लाभ दिए जाने, विभागों में रिक्त पदों पर नियुक्तियों के समय आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं के दृष्टिगत समायोजन में वरिष्ठता के क्रम में प्राथमिकता दिए जाने की मांग को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आज प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को पुनः ज्ञापन भेजा है। जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि प्रदेश के सरकारी विभागों के अलावा अर्ध सरकारी, स्वायत्तशासी एवं परिषदीय प्रतिष्ठानों के अंतर्गत भी बहुत अधिक संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी कार्य कर रहे है । आउट सोर्स कर्मचारियों की समस्याओं के लिए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने 24 दिसंबर को विधानसभा पर धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि एसजीपीजीआई लखनऊ में तकनीकी संवर्ग ,नर्सेज संवर्ग एवं डाटा एंट्री के लगभग 1000 कर्मचारी आउट सोर्स पर काम कर हैं। इन कर्मचारियों के स्थान पर संस्थान द्वारा नई नियुक्ति करने का प्रयास किया जा रहा है। संयुक्त परिषद ने इसका विरोध मुख्य सचिव एवम  मुख्यमंत्री से किया है।

 संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने मुख्यमंत्री से मांग किया है कि एसजीपीजीआई एक प्रतिष्ठित संस्थान है तथा वहां पर पहले से कार्य कर रहे आउटसोर्स  कर्मचारी ,जो कि पूर्णतया प्रशिक्षित, अनुभवी एवं चयन नियमों के प्रक्रियागत चयनित किए गए हैं, उन्हें विज्ञापित किए गए पदों पर समायोजित किया जाए। 24 दिसंबर के धरना प्रदर्शन कार्यक्रम में चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा , माध्यमिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, समाज कल्याण, नगरीय परिवहन, परिवहन निगम, राजस्व, वन, लोक निर्माण, महिला कल्याण, मलेरिया, फाइलेरिया, खाद्य रसद, आई टी आई, सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के साथ-साथ आशा बहुएं ,आंगनवाड़ी, रसोईया, चौकीदार भी बहुत अधिक संख्या में सम्मिलित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से 24 दिसंबर से पहले आउट सोर्स, संविदा कर्मचारियों एवं आशा बहू का मानदेय बढ़ाए जाने तथा उन को समायोजित करने पर निर्णय लेने की अपील किया है