Thursday , September 29 2022

महाराष्ट्र में भोंपू पर घमासान!

    

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 डॉ धीरज फूलमती सिंह

आज महाराष्ट्र की स्थिती राजनीतिक घमासान की वजह से डांवाडोल है। जब से महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी की सरकार सत्ता में काबिज हुई है,तब से महाराष्ट्र का राजनितीक स्वास्थ्य ठीक नही चल रहा है। कभी पालघर में हिदू साधूओं की हत्या सरकार पर सवालिया निशान लगा दे रही है तो कभी पुलिस और पत्रकार अरनव गोस्वामी के साथ विवाद सुर्खिया बटोर रहा है तो कभी अभिनेत्री कंगना राणावत के साथ झगडा स्थानीय विकास में बाधा बन जाता है तो फिर कभी मनसूख हिरेन और अंबानी परिवार के अंटालिया केस की वजह से सरकार कटघरे में खडी हो जाती है तो कभी मुंबई पुलिस का दागदार खौफनाक चेहरा आम अवाम को सहमा जाता है।
       महाराष्ट्र आज एक ऐसा प्रदेश बन गया है,जहाँ के रसूखदार कैबिनेट मंत्री तक जेल की हवा खा रहे है तो छगन भूजवल जैसे कुछ नेता हाल फिलहाल में जेल से जमानत पर छूट कर आने के बाद सत्ता की मलाई चाट रहे है। ऐसे मे आज महाराष्ट्र की धरती और सत्ता में फिर से उथल-पुथल मची  हुई है। कद्दावर शख्सियत बाला साहब जी ठाकरे के राजनितिक वारीश ठाकरे बंधू यान उद्धव जी ठाकरे और राज ठाकरे में खूब राजनीतिक गुत्थम-गुत्थी हो रही है। महाराष्ट्र में राजनीतिक वर्चस्व की लडाई अब अपने चरम पर है। यहाँ हर राजनीतिक दल हवन पर बैठा हुआ है,भाजपा उस में आहूति डालने का काम कर रही है तो राणा दंपत्ती साथ बैठ विरोध के तौर पर सहयोग ही कर रहे है तो संजय राउत बगल में खडे रह कर राजनितकीक पूजा-पाठ का मंत्र दोहरा रहे है।
    कुछ दिन पहले निर्दलीय सांसद और विधायक राणा दंपति ने उद्धव जी ठाकरे के घर मातोश्री के सामने हनुमान चालीस पाठ करने का आह्वान भी किया था,इस कारण वे अपने चुनाव क्षेत्र से मुबई भी आये थे लेकिन ऐन वक्त पर उन्होने अपना फैसला बदल दिया लेकिन काफी गहमा-गहमी की वजह से तीर कमान से निकल चुका था,उन पर राजद्रोह का केस दर्ज हो गया,वे दोनो जेल भी गये,जमानत भी मिली और उच्च न्यायालय ने उनपर लगे राजद्रोह के केस को खारिज भी कर दिया है,इस वजह से सरकार और मुंबई पुलिस की काफी किरकिरी भी हो रही है।
       यह वही मुंबई पुलिस है,जो अपने कर्तव्य परायणता और निर्वाह के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है,इस के काम करने की मिसाले दी जाती थी,आज सत्ता की कठपुतली बन कर गई है।यह बात भी सही है कि लोकतांत्रिक अधिकार का यह मतलब नही है कि कोई किसी के घर के सामने बिना इजाजत हनुमान चालीसा पढे या जबरदस्ती घर में घुसकर नमाज अदा करें।ऐसी हरकतें लोकतंत्र नही,खालिस गुडा गर्दी है। राणा दंपति को मातोश्री के सामने हनुमान चालीस पाठ का आव्हान नही करना चाहिए था,उनको पढना ही था तो किसी और बेहतर विकल्प की तलाश कर सकते थे लेकिन शायद वे भी राजनीतिक मोहरा बन कर रह गये।
        महाराष्ट्र की राजनिती में एकदम हासिये पर ढकेल दिये गए मनसे प्रमुख राज ठाकरे अपनी जमीन तलाशने के लिए वर्तमान में लाउडस्पीकर का बहाना लेकर सरकार पर हमलावर है। एक वक्त खालिस मराठी माणूस की राजनिती करने वाले राज ठाकरे आज हिदुत्व की पताका लेकर सबसे आगे चलने के प्रयास में लगे हुए है। यह वही राज ठाकरे है तो अपनी पार्टी मनसे के शुरुआती दिनों में मुंबई से उत्तर भारतीयों को खदेड़ने की बाते कर अजीब-ओ-गरीब विवादित बयान करते थे,उनकी पार्टी के कार्यकर्ता इनकी नजर में उंचा उठने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों पर काफी आक्रमक भी हुए थे,आज वही पार्टी राम मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या जाने का आव्हान कर रही है। आज इनको भगवान श्रीराम याद आ रहे है,जिनके वंशजों को कुछ साल पहले ये मार पीट कर मुंबई,नाशिक और पुणे से भगा रहे थे। राजनीति का ऊंट भी बडा बेहया होता है,कब किस करवट बैठ जाए,कोई कुछ कह नही सकता।
      आज कल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसे) मस्जिदों में होने वाले नियमित अजान में उपयोग होने वाले लाउडस्पीकर के बहाने महाराष्ट्र में हिदुत्व की राजनीति जमीन तलाश रही है। मस्जिदों में बजने वाले भोपू के विषय को लेकर संजीदा हो गए है। ध्वनी प्रदूषण के बहाने धार्मिक क्रिया कलापो पर निशाना साधा जा रहा है। ध्वनी प्रदूषण की बात है तो लाउडस्पीकर की ऊंची और कानफोड़ू आवाज का विरोध तो समझ में भी आता है लेकिन इस के लिए सभी धर्मो पर वंदिश लगानी होगी सिर्फ एक धर्म को निशाना बनाना जायज कैसे हो सकता है ?

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    साधारण शब्दो में कहूँ तो महाराष्ट्र की राजनिती में भोपूओं को लेकर आपस में खूब जोर आजमाईश हो रही है। मनसे प्रमुख और बाला साहब जी ठाकरे के भतिजे मस्जिदों की मानारों पर अजान के लिए लगे भोपूओ (लाउड स्पीकरों) को लेकर बवाल मचाये हुये है। उनका कहना है कि मस्जिदो से जब तक लाउड स्पीकर नही उतारे जाते तब तक वे मस्जिदों के सामने अपना “हनुमान चालीसा पाठ” का आदोलन रोकने वाले नही है। राज ठाकरे के ऐसे बयान से महाराष्ट्र में न सिर्फ कानून और व्यवस्था की स्थिती पैदा हो गई है बल्कि खूद को हिदुत्व का पैरोकार बताने वाली शिवसेना के सामने एक चुनौती पेश कर दी है। वह भी ऐसे समय जब हिदु हृदय सम्राट के तौर पर प्रसिद्ध बाला साहब जी ठाकरे के सुपुत्र उद्धव जी ठाकरे आज खूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री है। महाराष्ट्र में इन राजनैतिक हलचलों के मूल में निकट भविष्य के निकाय चुनाव है। मुंबई महानगर पालिका पर भी कब्जा करने की कोशिश होगी,जो शिवसेना को चुनावी ऑक्सीजन मुहैया करवाती है। पैतालीस हजार करोड के सालाना खजाने वाली मुंबई महानगर पालिका शिवसेना को ताकत देकर उसे मजबूत करती है।
      महाराष्ट्र में फिलहाल तक भोपूओं का कोई मुद्दा नही था। राज ठाकरे के साथ भाजपा नेताओं की पिछले दरवाजे से नियमित मुलाकातो के बाद अचानक से यह मुद्दत उठ खडा हो गया। राजनितिक गलियारो में यह खूसू-फूसूर भी हो रही है कि राज ठाकरे के लिए इस मुद्दे का ब्लू प्रिट भाजपा ने ही तैयार किया है। जिसके पीछे का मकसद हिदु वोटों का ध्रुवीकरण करना है। उधर इलाहाबाद कोर्ट ने “लाउड स्पीकर से अजान देना मुस्लिम नागरिको का मौलिक अधिकार नही है।” जैसा फैसला देकर एक तरह से ऐसी राजनिती को पीछे से समर्थन ही दिया है।
      महाराष्ट्र की राजनिती में इतनी उथल-पुथल के बाद भी सबसे ज्यादा आश्चर्य चकित मुझे कोई कर रहा है तो वो है महाराष्ट्र की राजनिती के चाणक्य शरद पवार और उनकी मरघट जैसी खामोशी। जब कि महाराष्ट्र का मुस्लिम समुदाय उनका कोर वोटर है और वे दम लगा सांस रोक कर बैठे है,न उनकी तरफ से,न उनकी पार्टी और न उनकी पार्टी के अन्य नेताओ की तरफ से ही कोई हलचल हो रही है और ना कोई भडकाऊ बयान बाजी। एक मजेदार बात बताता हूँ महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट से जितने मंत्री आज जेल की हवा खा रहे है,वे सब शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के ही विधायक और नेता है। अंडर वर्ल्ड और माफिया से दोस्ती को लेकर भी शरद पवार विवादों में घिरे है,आज भी उन इस बात को लेकर दोषारोपण किया जाता है,शंका जाहिर की जाति है लेकिन उनकी तरफ से ऐसा व्यवहार किया जाता है जैसे कुछ हुआ ही ना हो। उपर से उनकी पार्टी के नेताओ में सब को सांप सुंघ गया है। ना उद्धव जी ठाकरे का समर्थन और ना राज ठाकरे का कोई तगडा विरोध! बस बयान के नाम पर कागजी खाना पूर्ति! शायद सब समय की चाल को परख कर अपना दांव खेलने के इतजार में बैठे है ? महाराष्ट्र की आम जनता आशंकित जरूर रहती है कि सरकार अब गिरी तो तब गिरी और महाराष्ट्र की राजनिती का समय है कि एक कतार में खडा कर सबकी परिक्षा ले रहा है।