Thursday , October 6 2022

यूपी के किसानों के साथ न्याय करने की रालोद ने राज्यपाल से की मांग

लखनऊ।

उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानो के बकाये का भुगतान समेत अन्य समस्यायों को लेकर राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की और दस सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन सौंपा।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देश पर पार्टी के एक 12 सदस्यीय प्रतिनिधि ने राज्यपाल से भेंट की और गन्ना किसानों एवं प्रदेश की अन्य ज्वलंत समस्याओं से सम्बन्धित 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधि मण्डल में रालोद के के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मनजीत सिंह, राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे, टीम आरएलडी के राष्ट्रीय संयोजक अनुपम मिश्रा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय महासचिव आरिफ महमूद आदि शामिल थे।
उन्होने बताया कि प्रदेश में गन्ना किसानों का वर्ष 2021-22 का गन्ना भुगतान सहकारी व निजी चीनी मिलों पर 1,77,648.96 करोड रूपया बकाया है किसानों की फसलों की लागत बढ़ गई है और मंडियों में लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा। सरकार का किसानों की आय दुगुनी करने का वादा जुमला बनकर रह गया है। किसानों के पास न दवाई के लिए पैसे हैं और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए। आयेदिन किसी न किसी जिले में महिला उत्पीड़न की घटनाएं लगातार घटित हो रही हैं। नौकरी पाने के लिए प्रदेश का युवा वर्ग दर दर की ठोकरे खा रहा है लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
ज्ञापन में मांग की गयी कि गन्ना किसानों को बकाया गन्ना मूल्य मय ब्याज के तत्काल भुगतान कराया जाए, स्वामीनाथन आयोग के फॉर्मूले के अनुसार एमएसपी की गारण्टी का कानून बनाया जाए, लखीमपुर खीरी नरसंहार के पीडि़त किसान परिवारों को इंसाफ दिलाया जाए, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत व उप्र के सिक्ख व पूर्वांचलों के अन्य जनपदों के उपनिवेशन की भूमि कई पीढि़यों से खेत जोत रहे किसानों को उनकी जमीन से, जंगल विभाग की सम्पत्ति के नाम पर बेदखल करना बंद किया जाएं, उन्हें मालिकाना हक दिया जाए।
मांग है कि किसानों के सभी कर्जे माफ किये जाएं तथा किसान आन्दोलन के दौरान दर्ज किये गये सभी मुकदमें वापस लिए जाएं, आवारा पशुओं पर रोक लगाई जाए तथा आवारा पशुओं से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई की जाए, महिला उत्पीड़न की घटनाओं पर तत्काल अंकुश लगाया जाय जिससे प्रदेश की महिलाएं अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकें, सरकारी नौकरियों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाते हुये युवाओं/बेरोजगारों को शीघ्र नौकरियां दिलाई जाएं, अग्निपथ योजना वापस ली जाए तथा कानून व्यवस्था को चुस्त और दुरूस्त किया जाए।