Thursday , October 6 2022

जार्ज को स्मरण किया

लखनऊ।

जार्ज पुण्य व प्रेरक स्मृतियों को नमन जार्ज जितने बड़े संकल्पबद्ध समाजवादी उतने ही रेखांकित करने योग्य राष्ट्रसेवी थे । सत्ता की धुरी होने के बावजूद सत्ता की सुविधाप्रदायी बेड़ियों से मुक्त रहे । चीन के प्रतिकार व तिब्बत के सहयोग की वे अपने दौर की सबसे बड़ी आवाज थे । वे सादगी एवं समाजवाद को जीते थे । मुझे उनके सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त है । उनके साथ का हर पल कुछ न कुछ सिखाता था । मेरी पुस्तक भारत- रत्न लोहिया उनके मार्गदर्शन में लिखी गई थी । पंडित अटल बिहारी बाजपेयी व जार्ज के बीच राममनोहर लोहिया जी के समाजवाद , राष्ट्रवाद, लोकतंत्र सदृश विषयों पर ब 6 ए कृष्ण मेनन मार्ग पर चार घंटे की बातचीत में मुझे भी बैठने का सुअवसर मिला था । 4 घंटे के संवाद को सुनकर जो मेधा विकसित हुई वो 4 सौ पुस्तकों के अध्ययन से भी नहीं हो सकती थी । आज जार्ज अपने जीवन काल से भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होते हैं । जार्ज के मानवीय पक्ष को प्रतिबिंबित करने वाली दो घटनाओं का उल्लेख करना चाहूंगा । वे मीरा बाई गेस्ट हाउस में रुके हुए थे । मैं सुबह सुबह उनके लिए समोसा, बंद मक्खन व थर्मस में चाय लाया था, उन्होंने एक बंद व चाय सड़क पर टहल रहे एक विक्षिप्त को देकर आने को कहा । उनकी कई बातें हैं जिनपर चर्चा फिर कभी । आज जार्ज की जयंती है । आइये उन्हें याद करें और विक्षिप्त वंचितों को भोजन कराएं ।