Wednesday , October 5 2022

पीएम मोदी, शरीफ व जिनपिंग का हो सकता है आमना-सामना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसी सप्ताह उज्बेकिस्तान के समरकंद में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शासन प्रमुखों की परिषद की 22 वीं बैठक के इतर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एवं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ से अलग से मुलाकात होने की संभावना हैं।
विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि श्री मोदी उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर 15-16 सितंबर को वहां जा रहे हैं। वह समरकंद में एससीओ शिखर बैठक में भाग लेगें और इस शिखर बैठक के इतर श्री मोदी की कुछ नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी होंगी। हालांकि अभी इस बारे में कुछ और जानकारी नहीं दी गयी है।
गौरतलब है कि एससीओ शिखर सम्मेलन में आठ एससीओ सदस्य देशों के नेता भाग लेंगे जिनमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री श्री शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी भी शामिल हैं।
इस बैठक से पहले परिस्थितियां कुछ ऐसी करवट ले चुकीं हैं जिनमें श्री मोदी की श्री जिनपिंग तथा श्री शाहबाज शरीफ से द्विपक्षीय मुलाकातें होने की संभावनाएं बन रहीं हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार श्री मोदी ईरान के नये राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी से मिल सकते हैं।
एससीओ शिखर बैठक के ठीक पहले पूर्वी लद्दाख में गोगरा हॉट स्प्रिंग क्षेत्र से चीन की सेना के पीछे हटने के बाद अप्रैल 2020 की स्थिति की बहाली की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सोमवार को दोनों देशों की सेनाओं को वापसी की प्रक्रिया को पूरा कर लेना है। पेंगांग त्सो में फिंगर इलाके में कुछ मसले शेष बचे हैं जिनके समाधान को लेकर भी सकारात्मक संकेत हैं।
हालांकि देप्सांग, देम्चोक एवं दौलतबेग ओल्डी में भारत चीन सेनाओं के बीच गतिरोध अप्रैल 2020 के पहले का है। भारत ने चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के लिए सीमा पर अप्रैल 2020 के पहले की स्थिति बहाल करने की शर्त रखी थी। गोगरा हॉटस्प्रिंग में प्रगति से भारत एवं चीन के नेताओं की मुलाकात के लिए अनुकूल माहौल बना है।
सूत्रों ने श्री मोदी एवं श्री जिनपिंग के बीच बातचीत का आधार बनने की बात स्वीकार करते हुए कहा कि भारत एवं चीन के बीच लगातार कूटनीतिक एवं सैन्य कंमाडर स्तर की वार्ता से वातावरण में कटुता में धीरे धीरे कमी आ रही है। सेनाओं के एक दूसरे के आमने सामने हमलावर मुद्रा से हटने के बाद अब दोनों देशों के बीच सीमा पर दोनों ओर 50-50 हजार सैनिकों की संख्या में कमी लाने एवं तनाव को घटा कर हालात सामान्य स्तर तक लाने पर बात शुरू होने की उम्मीद बंधी है।
इसी प्रकार से पाकिस्तान में हाल में आयी भीषण बाढ़ के कारण ना केवल पाकिस्तान का भीषण नुकसान हुआ है बल्कि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) में चीन के निवेश वाली परियोजनाओं को भी अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के पाकिस्तान में हुए जानमाल के नुकसान पर सार्वजनिक रूप से दुख व्यक्त किये जाने के बाद पाकिस्तानी शासन के गलियारों में द्विपक्षीय बातचीत शुरू होने को लेकर अटकलें लगायी जाने लगीं हैं। हालांकि भारत ने आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है लेकिन अंदरखाने से कई संकेत इस संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं।
बेहद खराब अर्थव्यवस्था एवं खाली खज़ाना, अफगानिस्तान सीमा पर टकराव, बाढ़ के कारण जानमाल का जबरदस्त नुकसान और राजनीतिक अस्थिरता के कारण पाकिस्तान दुनिया भर में सहायता की गुहार लगा रहा है। चीन से भी उसे उस प्रकार की सहायता नहीं मिली है जैसी उसे अपेक्षा है। मालदीव, श्रीलंका एवं बंगलादेश को जिस प्रकार से भारत ने सहयोग दिया है, उससे पाकिस्तान के भीतर भी उनकी हुकूमत पर भारत से रिश्ते सुधारने का दबाव बढ़ रहा है। पाकिस्तान में भारत से व्यापारिक संबंध बहाल करने को लेकर भी आवाज़े उठ रहीं हैं। ऐसे में श्री शाहबाज शरीफ की श्री मोदी से मुलाकात होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी की श्री शाहबाज शरीफ से इससे पहले 25 दिसंबर 2015 को लाहौर में उनके पैतृक निवास रायविंड में मुलाकात हुई थी जब वह उनके बड़े भाई एवं तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ के बुलावे पर अफगानिस्तान से दिल्ली वापसी के दौरान अचानक लाहौर जा पहुंचे थे। श्री मोदी ने उस मौके पर श्री शरीफ की मां को तोहफे में एक साड़ी भेंट की थी और उनके पैर छू कर आशीर्वाद भी लिया था। जानकारों का कहना है कि श्री शरीफ की दिली तमन्ना है कि श्री मोदी से उनकी एक बार जरूर मुलाकात हो। वह इसके लिए लंदन में रह रहे बड़े भाई श्री नवाज़ शरीफ की भी मदद ले सकते हैं। यदि श्री मोदी और श्री शरीफ समरकंद में मिलते हैं तो एक निजी एवं पारिवारिक मुलाकात की पृष्ठभूमि में दाेनों के बीच इस पहली औपचारिक आधिकारिक बैठक में सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।
एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान पिछले दो दशकों में संगठन की गतिविधियों की समीक्षा तथा भविष्य में बहुपक्षीय सहयोग की संभावनाओं के साथ ही क्षेत्रीय एवं वैश्विक महत्व के सामयिक मुद्दों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।एससीओ सदस्य देशों के अन्य नेताओं में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, कज़ाखस्तान के राष्ट्रपति कसीम-जोमार्ट टोकायव, किर्गिज़ गणराज्य के राष्ट्रपति सदिर जापारोव और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन शामिल हैँ। इसके अलावा तीन पर्यवेक्षक देशों और चार आमंत्रित अतिथि देशों के नेता भी शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। पर्यवेक्षक देशों के नेताओं में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी और मंगोलियाई राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख प्रमुख हैं। जिन नेताओं को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है उनमें Turkish President Recep Tayyip Erdogan, President of Azerbaijan Ilham Aliyev, Prime Minister of Armenia Nikol Pashinyan and President of Turkmenistan Serdar Berdimuhamedo हैं।