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शनिवार को करें पूर्णिमा का श्राद्ध – पंडित आत्मा राम पाण्डेय

लखनऊ।

पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं. उनकी कृपा से जीवन में आने वाली कई प्रकार की रुकावटें दूर होती हैं. व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों से भी मुक्ति मिलती
है।

ज्योतिषाचार्य पं० आत्मा राम पाण्डेय जी ने बताया कि श्राद्ध न होने स्थिति में पितरों के आत्मा को पूर्ण मुक्ति नहीं मिलती. पितृ पक्ष में नियमित रूप से दान- पुण्य करने से कुंडली में पितृ दोष दूर हो जाता है. पितृपक्ष में श्राद्ध और तर्पण का खास महत्व होता है.

आयु: प्रजां धनं विद्यां स्वर्ग मोक्षं सुखानि च। प्रयच्छन्ति तथा राज्यं पितर: श्राद्ध तर्पिता:।।

हिन्दू धर्म में पितृपक्ष का काफी महत्व है. पितृ पक्ष पर पितरों की मुक्ति के लिए कार्य किए जाते हैं।पितृपक्ष में पूर्वजों का आशीर्वाद लिया जाता है और गलतियों के लिए क्षमा मांगी जाती है. इन दिनों में पूर्वजों या पितरों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं और उनके लिये पिण्डदान करते हैं. पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है।

पितृ पक्ष पूर्णिमा का श्राद्ध 10 सितंबर 2022को करें।

10 सितम्बर से लेकर 25 सितम्बर 2022 तक पितृ पक्ष है।
इन 16 दिनों में परिवार के उन मृत सदस्यों के लिए श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु शुक्ल और कृष्ण पक्ष प्रतिपदा में हुई थी. मान्यता है कि श्राद्ध करने से घर में सुख-समृद्धि आती है.

अपने हिन्दू धर्म में श्राद्ध

पितृपक्ष का बहुत ही अधिक महत्व होता है। पितृपक्ष को श्राद्ध पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। पितृपक्ष में पितरों का विशेष श्राद्ध,तर्पण तथा पार्वण श्राद्ध आदि भी किया जाता है । इस पक्ष में विधि- विधान से पितर संबंधित कार्य करने से पितरों का आर्शावाद प्राप्त होता है। पितृपक्ष की शुरुआत भाद्र मास में शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होती है। आश्विन मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृपक्ष ही रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष के दौरान पितर संबंधित कार्य करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

इस साल पितृपक्ष 10 सितंबर 2022 को पूर्णिमा से आरंभ हो जाएगा इसी दिन पूर्णिमा तिथि में मरे हुए व्यक्ति का श्राद्ध किया जाता है । पितृपक्ष 25 सितंबर 2022 रविवार को समाप्त होगा ।

पितृ पक्ष में मृत्यु की तिथि के अनुसार श्राद्ध किया जाता है। अगर किसी मृत व्यक्ति की तिथि ज्ञात न हो तो ऐसी स्थिति में अमावस्या तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। इसे सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध के रूप में माना जाता है।

पितृपक्ष में श्राद्ध की तिथियां।

पूर्णिमा श्राद्ध – 10 सितंबर 2022 शनिवार ।
प्रतिपदा श्राद्ध – 11 सितंबर 2022 रविवार ।
द्वितीया एवं तृतीया श्राद्ध – 12 सितंबर 2022 सोमवार।
चतुर्थी श्राद्ध – 13 सितंबर 2022 मंगलवार
पंचमी श्राद्ध – 14 सितंबर 2022बुधवार
षष्ठी श्राद्ध – 15 सितंबर 2022 गुरुवार
सप्तमी श्राद्ध – 17 सितंबर 2022 शनिवार
अष्टमी श्राद्ध- 18 सितंबर 2022 रविवार
मातृनवमी श्राद्ध – 19 सितंबर 2022 सोमवार
दशमी श्राद्ध – 20 सितंबर 2022 मंगलवार
एकादशी श्राद्ध – 21 सितंबर 2022 बुधवार
द्वादशी श्राद्ध- 22 सितंबर 2022 गुरुवार
त्रयोदशी श्राद्ध – 23 सितंबर 2022 शुक्रवार
चतुर्दशी श्राद्ध- 24 सितंबर 2022 शनिवार
सर्वपितृअमावस्या श्राद्ध- 25 सितंबर 2022 रविवार
👉इस बार 16 सितंबर शुक्रवार को कोई भी श्राद्ध नही है ।

पितृ पक्ष का मुहूर्त

पितृ पक्ष श्राद्ध, पर्व श्राद्ध (पार्वण श्राद्ध) होते हैं और इन्हें करने का शुभ समय कुतुप मुहूर्त और रोहिना मुहूर्त होता है. इन दोनों शुभ मुहूर्त के बाद अपराह्न काल समाप्त होने तक भी मुहूर्त चलता है. श्राद्ध के अंत में तर्पण (तर्पण) किया जाता है जिसमें सूर्य की तरफ मुंह करके घास की कुश (डाव) से देते हैं. प्रतिपदा श्राद्ध शनिवार, 10 सितंबर 2022 से शुरू हैं तो इस दिन श्राद्ध अनुष्ठान का समय भी जान लीजिए.

अपराह्न मुहूर्त – 01:49 अपराह्न से 04:17 अपराह्न, अवधि: 02 घंटे 28 मिनट

पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां

पितृपक्ष में ना करें ये गलतियां

हिंदू शास्त्रों में प्याज और लहसुन को ‘तामसिक’ माना जाता है, जो हमारी इंद्रियों को प्रभावित करती है. पितृपक्ष की अवधि के दौरान, खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए.

पितृपक्ष के दौरान कोई भी जश्न या उत्सव नहीं मनाना चाहिए और ना ही इसका हिस्सा बनना चाहिए. इस अवधि में किसी भी तरह का जश्न मनाने से आपके पूर्वजों के प्रति आपकी श्रद्धा प्रभावित होती है.

पितृपक्ष की अवधि को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान कुछ भी नया शुरू ना करने की सलाह दी जाती है. इस दौरान परिवार के सदस्यों को कुछ भी नई चीज नहीं खरीदनी चाहिए.

पितृपक्ष का समय पूर्वजों को समर्पित है, इसलिए इस अवधि में शराब या मांसाहारी भोजन के सेवन से बचना चाहिए.

पितृपक्ष के दौरान नाखून काटने, बाल कटवाने और दाढ़ी बनवाने से बचना चाहिए.

पितृपक्ष में कैसे करें पितरों को याद

पितृपक्ष में हम अपने पितरों को नियमित रूप से जल अर्पित करें. यह जल दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके दोपहर के समय दिया जाता है. जल में काला तिल मिलाया जाता है और हाथ में कुश रखा जाता है. जिस दिन पूर्वज की देहांत की तिथि होती है, उस दिन अन्न और वस्त्र का दान किया जाता है. उसी दिन किसी निर्धन को भोजन भी कराया जाता है. इसके बाद पितृपक्ष के कार्य समाप्त हो जाते हैं।

ज्योतिषाचार्य
पंडित आत्मा राम पांडेय “काशी”
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