Thursday , October 6 2022

उत्तर प्रदेश में जज असुरक्षित !


लखनऊ/वाराणसी। कहते हैं कि योगी जी की सरकार आने के बाद उत्तर प्रदेश में कानून का राज है। लोग भयमुक्त हैं। ऐसे में अगर कोई जज अपने और परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता प्रकट करता है तो बड़ी बात है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद परिसर में सर्वे मामले की सुनवाई कर रहे स्थानीय अदालत के न्यायाधीश ने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

सिविल जज सीनियर डिवीजन रवि कुमार दिवाकर ने मामले की सुनवाई के बाद अपने फैसले में कहा कि इस प्रकरण में कमीशन की कार्यवाही एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इसे लेकर डर का माहौल पैदा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कमीशन की ऐसी कार्यवाही अधिकतर सिविल वादों में सामान्यत: की जाती है।

न्यायाधाीश ने मुस्लिम पक्ष द्वारा वीडियोग्राफी सर्वे के लिये नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर को लेकर विवाद पैदा किये जाने के संबंध में कहा कि इस तरह के सामान्य कमीशन के प्रति ऐसी आपत्ति शायद ही की जाती हो। उन्होंने कहा कि इस साधारण से सिविल वाद को बहुत ही असाधारण बनाकर एक डर का माहौल पैदा कर दिया गया। डर इतना है कि मेरे परिवार को बराबर मेरी ओर मुझे अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता बनी रहती है। घर से बाहर होने पर बार बार पत्नी के द्वारा सुरक्षा के प्रति चिंता व्यक्त की जाती है। कल लखनऊ में माता जी ने भी बातचीत के दौरान मेरी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की और मीडिया के द्वारा प्राप्त खबरों से उन्हे यह जानकारी हुई कि शायद मैं भी कमिश्नर के रुप में मौके पर जा रहा हूं और मेरी माताजी के द्वारा मुझे मना किया गया कि मैं मौके पर कमीशन पर न जाऊं क्योंकि इससे मेरी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

न्यायाधीश ने वीडियोग्राफी सर्वे के लिये नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को हटाने की मुस्लिम पक्ष की अर्जी को खारिज कर दिया। लेकिन अदालत ने सर्वे के लिये एक अन्य विशेष अधिवक्ता कमिश्नर के रूप में विशाल कुमार सिंह की नियुक्ति की। ये दोनों कमिश्नर संयुक्त रूप से सर्वे का काम करेंगे। किसी एक की अनुपस्थिति में दूसरा सर्वे का काम करेगा। इसके साथ ही अदालत ने सहायक एडवोकेट कमिश्नर के रूप में अजय प्रताप सिंह को भी नियुक्त किया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जिला प्रशासन किसी भी प्रकार का बहाना बनाकर कमीशन की कार्यवाही को टालने का प्रयास न करे। यह स्पष्ट किया गया है कि आज का आदेश अदालत के पूर्ववर्ती आदेश के अनुक्रम में है। हिंदू पक्ष के वकीलों के अनुसार अदालत के फैसले के बाद अब मस्जिद परिसर में तहखाना सहित पूरे मस्जिद परिसर में वीडियोग्राफी सर्वे के काम का रास्ता साफ हो गया है। हिंदू पक्ष ने अदालत को बताया था कि गत सात मई को वीडियोग्राफी सर्वे के दूसरे दिन मुस्लिम पक्ष के रुकावट के कारण सर्वे का काम नहीं हो पाया था।