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नौकरी से हैं परेशान तो सिर्फ दो दस्तावेजों के आधार पर शुरू करें अपना कारोबार, बने प्रॉपराइटर

लखनऊ । प्रॉपराइटरशिप आपको उद्यमी बनाता है और बिजनेस खड़ा करने के लिए कानूनी अनुपालनों का झंझट भी नहीं होता। 40 लाख रुपए तक के सालाना कारोबार पर आपको टैक्स भी नहीं चुकाना पड़ेगा। यदि आप नौकरी के बंधन में रहना पसंद नहीं करते हैं तो प्रॉपराइटरशिप आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। इसके तहत आप आम जरूरत के सामान का स्टोर खोल सकते हैं, टी स्टॉल शुरू कर सकते हैं या फिर कोई छोटी-मोटी फैक्टरी भी खोल सकते हैं।

प्रॉपराइटरशिप फर्म शुरू करने के लिए मोटे तौर पर सिर्फ दो दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है- एड्रेस प्रूफ और आईडी प्रूफ। आप सिर्फ आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड और रेंट एग्रीमेंट के साथ बिजली बिल लगाकर नगर निगम से लाइसेंस ले सकते हैं और गुमास्ता पंजीकरण करा सकते हैं। कुछ राज्यों में नगर निगम के पास दुकान या फर्म का फोटो भी जमा कराना पड़ता है।

 

प्रॉपराइटरशिप शुरू करने के चार चरण

एंटीटी का नाम रखें

बिजनेस एंटीटी के नाम पर ही उसका रजिस्ट्रेशन होगा। किसी अन्य एंटीटी से मिलते-जुलते नाम पर भी आप बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

जगह तय करें

नाम की तरह प्रॉपराइटरशिप फर्म के तहत शुरू किए जा रहे बिजनेस की जगह भी तय होनी चाहिए। पते के बिना रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा। रेंट पर ले रहे हैं तो एनओसी भी ले लें।

पूंजी जुटाएं

हर बिजनेस के लिए पूंजी की जरूरत होती है। यदि पूंजी नहीं है तो आप प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत बैंक से रियायती दरों पर लोन ले सकते हैं।

कानूनी औपचारिकता

नगर निगम से प्रॉपराइटरशिप के तहत खोले गए फर्म का लाइसेंस लें और गुमास्ता पंजीकरण कराएं। पैन न हो तो यह भी बनवा लें। इन दो दस्तावेजों से आपका काम हो जाएगा।

प्रॉपराइटरशिप के तीन बड़े फायदे

नियमों का न्यूनतम बंधन

प्रॉपराइटरशिप में नियम-कायदों का ध्यान रखने की कम जरूरत होती है। चूंकि बिजनेस के संचालक और मालिक आप खुद होते हैं, लिहाजा ज्यादातर जिम्मेदारियां खुद के प्रति होती है। इसमें नियामकों का दखल न के बराबर होता है।

बिजनेस पर पूरा कंट्रोल

प्रॉपराइटरशिप पर आपका पूरा नियंत्रण बना रहता है। फैसले करने की पूरी आजादी होती है। इसमें किसी और की भागीदारी नहीं होने के चलते बिजनेस की लागत, मार्जिन, रणनीति और अन्य संवेदनशील चीजों को लेकर पूरी तरह गोपनीयता बनी रहती है।

अलग से रिटर्न फाइल नहीं करना होता

प्रॉपराइटरशिप फर्म के लिए अलग से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की जरूरत नहीं होती है। यदि मालिक के ऊपर रिटर्न भरने का दायित्व आता है तो प्रोप्राइटर के इनकम टैक्स रिटर्न में ही प्रोपइटरशिप फर्म के आय-व्यय का ब्योरा चला जाता है।

प्रॉपराइटरशिप क्या है?

प्रॉपराइटरशिप गैर-पंजीकृत बिजनेस का एक मॉडल है, जिसका मालिक एक व्यक्ति होता है और वो ही उसे संभालता भी है। देश में असंगठित क्षेत्र के अधिकांश उद्यमी अपना बिजनेस प्रॉपराइटरशिप के तौर पर रजिस्टर करवाना पसंद करते हैं। दरसअल, इसके तहत बिजनेस करने के लिए बहुत कम नियामकीय अनुपालनों की जरूरत होती है। ऐसे उद्यमियों का दायित्व सीमित होता है।

40 लाख तक जीएसटी मुक्त

प्रॉपराइटरशिप के तहत कोई रिकॉर्ड मेंटेन नहीं करना पड़ता है। यदि सालाना कारोबार 40 लाख रुपए से कम हो तो जीएसटी की भी जरूरत नहीं है। सालाना टर्नओवर यदि 40 लाख से ज्यादा और 2 करोड़ रुपए से कम हो तो यह जीएसटी के दायरे में तो आएगा, लेकिन आम तौर पर टैन (टैक्स डिडक्शन अकाउंट नंबर) की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानि बिजनेस ऑडिट फ्री रहेगा।