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पूर्व एमएलसी का बेटा दिल्ली में चढ़ा यूपी पुलिस के हत्थे, चाचा और भाई हुए फरार

लखनऊ/सहारनपुर।

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर पुलिस ने शुक्रवार को गैंगस्टर एक्ट में आरोपी खनन माफिया हाजी इकबाल उर्फ बाल्ला के बेटे अलीशान को दिल्ली में लाजपत नगर से गिरफ्तार कर लिया। अलीशान को उसके पिता एवं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व विधान परिषद सदस्य हाजी इकबाल गिरोह का सक्रिय सदस्य बताया गया है।

सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) आकाश तोमर ने यह जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को अलीशान की कई मुकदमों में तलाश थी। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी ने एसआईटी का भी गठन किया हुआ है। अलीशान की गिरफ्तारी के बाद हाजी इकबाल, उसका भाई पूर्व बसपा एमएलसी महमूद अली और हाजी इकबाल के बेटे जावेद, वाजिद एवं अफजाल भूमिगत हो गए हैं। जिले के मिर्जापुर थाना क्षेत्र में स्थित हाजी परिवार के आवास पर ताले लगे हैं। तोमर ने बताया कि पुलिस अलीशान से उनके परिवार के अन्य सदस्यों के छिपने के ठिकानों की मालूमात कर अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास करेगी। उन्होंने बताया कि अलीशान और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ थाना बेहट और थाना मिर्जापुर में कई मुकदमें दर्ज हैं।

थाना बेहट में दर्ज एक मुकदमा 80 बीघा जमीन को एजूकेशनल ट्रस्ट के नाम पर फर्जीवाड़ा कर आवंटन कराने से जुड़ा है। पुलिस ने पिछले दिनों हाजी इकबाल के नौकर नसीम अहमद को भी गिरफ्तार किया था। वह हाजी इकबाल की तीन शुगर मिलों और 50 करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाली संपत्ति का स्वामी है। पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत नौकर के नाम हाजी की 21 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति को एक पखवाड़ा पहले कुर्क किया था।

इतना ही नहीं 600 बीघा जमीन को भी राजस्व विभाग कुर्क कर अपने कब्जे में ले चुका है। नाैकर नसीम के बारे में क्षेत्रीय खाद्य आपूर्ति अधिकारी अश्विनी मिश्रा ने आज बताया कि अरबों की बेनामी संपत्ति का मालिक नसीम अहमद आपूर्ति विभाग से अंत्योदय कार्ड के जरिए मुफ्त का राशन भी प्राप्त कर रहा था।

तोमर ने बताया कि अभी तक हाजी इकबाल के साथ खनन कारोबार करने वाले उनके पार्टनर एवं हाल ही में भाजपा में शामिल हुए अमित जैन ने थाना मिर्जापुर में इकबाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। सहारनपुर के महावीर कालोनी निवासी अमित जैन ने पुलिस को बताया कि वर्ष 2003 और 2006 में खनन पट्टे स्वीकृत हुए थे। पट्टों को खनन माफिया हाजी इकबाल, उसका भाई महमूद अली, रिश्तेदार एवं नौकर नसीम संचालित करते थे। सभी पत्राचार और खनन फर्मों में वित्तीय लेनदेन और आयकर विभाग के रिटर्न महमूद अली जमा करता था।

राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में 18 फरवरी 2016 को 50 करोड़ का जुर्माना अमित जैन की फर्म पर लगाया था। अमित जैन पिछले दिनों भाजपा में शामिल हो गया था। अब उसने बताया है कि हाजी इकबाल की फर्म में उसकी केवल 5 फीसद की हिस्सेदारी थी। जैन का आरोप है कि हाजी इकबाल आदि ने उसके फर्जी हस्ताक्षर बनाकर खनन विभाग में एमएम 11 फार्म जारी कराए थे।

तोमर ने बताया कि जैन की तहरीर पर थाना मिर्जापुर में हाजी इकबाल, उसके भाई महमूद अली समेत चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस जल्द ही पूरे गिरोह को गिरफ्तार कर लेगी। उसके ठिकानों पर दबिश जारी है।