Friday , September 30 2022

रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने थल,जल, वायु और आंतरिक सुरक्षा पर एशिया की सबसे बड़ी ‘रक्षा प्रदर्शनी 2022’ की समीक्षा की

नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने थल,जल, वायु और आंतरिक सुरक्षा पर एशिया की सबसे बड़ी ‘रक्षा प्रदर्शनी 2022’ की तैयारियों की सोमवार को समीक्षा की। रक्षा प्रदर्शनी का आयोजन गुजरात के गांधीनगर में दस से 14 मार्च तक किया जा रहा है।


दो वर्ष में एक बार होने वाली इस प्रदर्शनी के आयोजन को लेकर पिछले वर्ष के शुरू में कोरोना महामारी के मद्देनजर उहापोह की स्थिति बनी हुई थी लेकिन घरेलू रक्षा उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गत 31 जुलाई को इस प्रदर्शनी के गांधीनगर में आयोजन की मंजूरी दे दी। हाल ही में कोरोना संक्रमण में कमी के बाद कई पाबंदियों को समाप्त किये जाने से आयोजकों तथा प्रदर्शनी में हिस्सा लेने वाली कंपनियों का उत्साह बढा है और इसकी तैयारी पूरी तेजी से की जा रही हैं।


कोरोना महामारी के मद्देनजर रक्षा प्रदर्शनी का आयोजन हाइब्रिड मोड में यानी भौतिक तथा वर्चुअल दोनों माध्यम से किया जा रहा है जिससे कि ज्यादा से ज्यादा लोग तथा कंपनी इसमें हिस्सा ले सकें। प्रदर्शनी का आयोजन तीन स्थानों पर करीब एक लाख वर्ग मीटर क्षेत्र में किया जा रहा है। प्रदर्शनी हेलिपेड प्रदर्शनी केन्द्र में लगेगी जबकि सेमीनारों का आयोजन महात्मा मंदिर सम्मेलन तथा प्रदर्शनी केन्द्र में और लोगों के लिए हथियारों का प्रदर्शन साबरमती नदी पर किया जायेगा।


रक्षा मंत्री ने उल्लेख किया कि कोविड प्रोटोकॉल में हाल ही में दी गयी ढील के बाद प्रदर्शनी को लेकर सबकी रूचि बढी है और अब तक की संख्या के अनुसार इसमें 78 देश, 39 मंत्री स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और 1000 से अधिक कंपनियां हिस्सा ले रही हैं।
श्री सिंह ने कहा कि प्रदर्शनी की अवधि एक दिन बढायी गयी है जिससे स्थानीय छात्रों को विशेष लाभ होगा क्योंकि उनके लिए प्रदर्शनी में जाने के विशेष ट्रिप आयोजित किये जा रहे हैं। प्रदर्शनी के अंतिम दिन 14 मार्च को राज्य के स्कूलों तथा कॉलेज के छात्रों को प्रवेश दिया जायेगा।


रक्षा मंत्री ने प्रदर्शनी की तैयारियों की समीक्षा के बाद विश्वास व्यक्त किया कि इसका आयोजन सभी सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर सफलतापूर्वक किया जायेगा। इस मौके पर रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट, सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे, रक्षा सचिव डा अजय कुमार, डीआरडीओ के अध्यक्ष डा जी सतीश रेड्डी, वित्त सलाहकार (रक्षा सेवा) संजीव मित्तल और रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।